इंदौर। हमारे जीवन में गुरु का विशेष महत्व होता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी बढ़कर माना जाता है। संस्कृत में श् गु श् का अर्थ होता है, अंधकार तथा श् रु श् का अर्थ होता है प्रकाश। गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। महान गुरु वेदव्यासजी की जयंती के शुभ अवसर पर ही यह पर्व मनाया जाता है। यह बात शनिवार को इंदौर के सिका सीनियर सेकेंडरी स्कूल नंबर 2, स्कीम नंबर 54, विजय नगर में गुरु पूर्णिमा समारोह में स्कूल की प्राचार्या सूजा मैम ने स्टूडेंट्स को गुरु महत्व एवं शिक्षा के महत्व पर कही। गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम का भव्य समारोह बड़े ही श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल की प्राचार्या सूजा मैम द्वारा मां सरस्वती एवं महर्षि वेदव्यासजी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सरस्वती वंदना के साथ हुआ। उसके बाद सभी स्टूडेंट्स ने लयबद्ध गुरु भजन की प्रस्तुति दी। इस दौरान कक्षा 10वीं की स्टूडेंट्स विधि गोयल द्वारा गुरु महत्व पर भाषण दिया गया। इसके पश्चात् कक्षा 11वीं के स्टूडेंट्स द्वारा भजन की प्रस्तुति दी गई। इसके उपरांत कक्षा सातवीं एवं आठवीं के स्टूडेंट्स द्वारा गुरु नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसमें गुरु महर्षि वाल्मीकिजी का जीवन चरित वर्णित किया गया।
इस मौके पर कक्षा 10वीं की स्टूडेंट्स ने भव्य एवं मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति दी, जिसे सभी ने सराहा। इसके बाद स्कूल की प्राचार्या सूजा मैम ने स्टूडेंट्स को गुरु महत्व एवं शिक्षा के महत्व पर विस्तार से समझाया। कार्यक्रम का संचालन अभिषेक सर ने किया।