नीमच। शहर की जांगीड़ ब्राह्मण धर्मशाला में आयोजित शैलेंद्र शैली स्मृति व्याख्यान माला में भारत का संविधानः योगदान और चुनौतियां विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में लोकजतन समाचार पत्र के संपादक बादल सरोज ने अपने उद्बोधन में कहा कि अगर संविधान नहीं होता तो आज हिंदुस्तान नहीं होता। संविधान में असहमति व्यक्त करने का, सरकार के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार दिया गया है। संविधान ने तय किया कि सारे लोग बराबर होंगें ।संविधान वह पहली किताब है जिसमें लिखा गया है कि किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं होगा। संविधान की मंशा थी कि भारत समृद्ध और मजबूत बने।सौ प्रतिशत साक्षरता हो। स्वास्थ्य की सुविधा सबके लिए समान हो। विचारणीय प्रश्न है कि हम आज कहां खड़े हैं? हमारी एकता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कमाई के मामले में खाई जैसा अनुपात है। संविधान बंद किताब की तरह पड़ी है। सरोज बादल ने कहा कि पिछले 10 साल से जो लोग सरकार में बैठे हैं उनका संविधान में विश्वास नहीं है। संविधान हमारी आजादी को बनाए रखने की गारंटी है। सामाजिक समानता और धर्मनिरपेक्षता की बात संविधान में कही गई। जो आज नजर नहीं आ रही। भारत वो अद्भुत देश है,जहां पर दुनिया के सभी नस्ल के लोग पाए जाते हैं। बादल ने कहा कि सभी ने मिलकर इस देश को बनाया। संविधान में कहा गया है कि हम ऐसी नीति बनाएंगे जिससे संपत्ति एक जगह इकट्ठा नहीं होना चाहिए। लेकिन सब कुछ उलट हो रहा है। संविधान को जानना और समझना बहुत जरूरी है। व्याख्यान माला की अध्यक्षता निरंजन गुप्ता राही ने की। कार्यक्रम में शैलेंद्र सिंह ठाकुर, किशोर जेवरिया, प्रकाश भट्ट तरूण बाहेती, जिनेंद्र सुराना, पृथ्वी सिंह वर्मा, सुनील शर्मा और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रियंका कविश्वर ने किया।