मनासा। स्थानीय अनुपपुरा गली स्थित जैन उपाश्रय में चातुर्मास हेतु विराजित प्रवचन प्रभाविका परम् पूज्य सौम्ययशा श्रीजी म.सा.आदि ठाणा 5 ने सतत चल रही व्याख्यान माला में 14 अगस्त को उपस्थित श्रोताओं को बताया कि जिनसाशन गौरव परम् उपकारी विनय विजय जी म.सा. द्वारा रचित ग्रन्थ ष्शांत सुधारसष् हमें आत्म कल्याण की प्रेरणा देते हुए कहता है कि हमने उत्तम कुल में,उत्तम धर्म में जन्म लिया है बावजूद इसके यदि हमारा दिमाग उत्तम नही है तो सब व्यर्थ है। शांत सुधारस हमारे विचारों को, व्यवहारों को,क्रिया-कलापों को उत्तम करने का अवसर उपलब्ध करवा रही है। इसलिए इसके श्रवण मात्र से हम पापों से मुक्त नही होंगें बल्कि हमें इसके उपदेशों को आत्मसात करना होगा। परमात्मा ने हमें पाँच कमलों से नवाजा है,नयन कमल,मुख कमल,हस्त कमल,ह्रदय कमल और चरण कमल। इन कमल को कांटे बनाना याने कि जिंदगी बर्बाद करना है। हमने शरीर को असंख्य बार रगड़-रगड़ कर साफ़ कर लिया है अब दिल की सफ़ाई करने का सुअवसर आया है। हम परमात्मा के साशन में जीवित इंसानों को मार्ग दिखाने वाले चक्षु बन कर आये है। इस दुनिया मे न तो कोई किसी का हुआ है और न ही होगा। इसलिए शांत सुधारस अंतर्मन के पापों को धोने आई है इसका पूरा लाभ उठाकर जीवन को धन्य बना लो।
इस अवसर पर पूज्य समर्पिताश्रीजी म.सा. ने भी सती अंजना के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए पाप कर्म एवं पुण्य कर्म की व्याख्या करते हुए प्रेरक विचार रखे। पूज्य अर्पिता श्रीजी ने नवम तप की तपस्वी बहन सुषमा बाबेल की सुख साता पूछते हुए अनुमोदना की। बाबेल परिवार से नरेंद्र बाबेल ने गुरुपूजन किया। उपस्थित श्रीसंघ ने तपस्वी सुषमा बेन बाबेल की खूब खूब अनुमोदना की।