उज्जैन। श्री महाकालेश्वर भगवान की भाद्रपद माह में निकलने पहली सवारी व क्रम अनुसार छठी सवारी सोमवार को जन्माष्टमी पर्व पर भगवान ,महाकाल के मंदिर से निकली। भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव पर राजा महाकाल प्रजा को दर्शन देने निकले तो प्रजा ने हाथ जोड़कर भगवान महाकाल और श्री कृष्ण के जयकारे लगाकर सवारी का अभिनन्दन किया। इस बार सवारी के साथ घटाटोप का मुखारविंद शामिल हुआ। वहीं बैतूल के गोण्ड जनजातीय के 50 से अधिक कलाकार ठाट्या नृत्य करते हुए साथ चलें।
श्री महाकालेश्वर भगवान की छठी सवारी चार बजे मंदिर से धूम धाम से निकली। महाकालेश्वर भगवान की सवारी निकलने के पूर्व सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन हुआ उसके पश्चात भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर पालकी में विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकलें। पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नन्दी रथ पर श्री उमा-महेश, डोल रथ पर श्री होल्कर स्टेट के मुखारविंद के साथ ही रथ पर घटाटोप मुखारविंद सम्मिलित हुआ।
मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा पालकी में विराजित भगवान को सलामी दी। सवारी के साथ भजन मंडली के अलावा हजारों भक्त झांझ, मंजीरे, ढोल, ढमरू बजाते हुए शामिल हुए। वहीं बैतूल के गोण्ड जनजातीय समूह द्वारा ठाट्या नृत्य की प्रस्तुति सवारी के साथ रही।
यह रहेगा सवारी का मार्ग
भगवान महाकाल की सवारी का गोपाल मंदिर में पूजन होगा इस दौरान हरी और हर का मिलान भी देखने को मिलेगा। सवारी महाकाल मंदिर से प्रारंभ होकर परंपरागत मार्ग महाकाल चौराहा, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाडी होती हुई रामघाट पहुंचेगी। जहां पर मोक्षदायिनी माँ शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार से होती हुई पुनरू श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी।