मनासा। श्री राम द्वारा मनासा में चल रही चतुर्थ दिवस की श्री मद भागवत कथा के रसिक प्रवक्ता संत चेतनराम जी महाराज ने अपनी मधुरमय वाणी से ध्रुव चरित्र ,समुद्र मंथन , वामन अवतार और इसी के साथ ही राम जन्म कथा का वर्णन एवं आज का मुख्य प्रसंग श्री कृष्ण जन्म महोत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया गया। संत श्री ने ध्रुव चरित्र का वृतांत सुनाते हुवे कहा की ध्रुव अपने पिता की गोद में बैठा था जिसे देख कर उसकी सौतेली मां ने जलन भावना के कारण उसको पिता की गोद से उतार दिया। उक्त घटना से पांच साल के ध्रुव को गहरा सदमा लगा। और अपनी मां सुनीति के समक्ष उसके साथ हुए व्यवहार के बारे में कहा। मां ने कहा, बेटा ध्रुव तेरी सौतेली से तेरे पिता अधिक प्रेम करते हैं। इसी कारण वे हम दोनों से दूर हो गए हैं। अब हमें उनका सहरा नहीं रह गया। हमारे सहारा तो जगतपति नारायण ही है। नारायण के अतिरिक्त अब हमारे दुख को दूर करने वाला कोई दूसरा नहीं बचा। पांच साल के बालक के मन पर दोनों ही मां के व्यवहार का बहुत गहरा असर हुआ और वह एक दिन घर छोड़कर भगवान नारायण की खोज में चला गया। तब नारद मुनि ने उसे ॐ नमोरू भगवते वासुदेवाय मंत्र की दीक्षा दी। वह बालक ध्रुव यमुना नदी के तट पर मधुवन में इस मंत्र का जाप करने लगा।
बालक ध्रुव की कठोर तपस्या से अत्यंत ही अल्पकाल में भगवान नारायण प्रसन्न हो गए और उन्होंने दर्शन देकर कहा हे बालक मैं तेरे अंतरमन की व्यथा और इच्छा को जानता हूं। तेरी सभी इच्छापूर्ण होगी और तुझे वह लोक प्रदान करता हूं जिसके चारों और ज्योतिचक्र घुमता रहता है और सूर्यादि सभी ग्रह और सप्तर्षि नक्षत्र जिसके चक्कर लगाते रहते हैं। प्रलयकाल में भी इस लोक का नाश नहीं होगा। सभी प्रकार के सर्वाेत्तम ऐश्वर्य भोगकर अन्त समय में तू मेरे लोक को प्राप्त करेगा।
चेतनराम जी ने इस कथा का सार बतलाते हुवे कहा की सच्चे मन से भगवान की प्रार्थना करने से भगवान भक्तो की जरूर सुनते हे ।संत श्री ने भगवान नारायण की लीला वामन अवतार, श्रीराम जन्म की कथा, के साथ ही श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का विस्तार से बतलाते हुवे भगवानवका जन्मोत्सव मनाया। उपस्थित सेकड़ो भक्तों सहित क्षेत्रीय विधायक माधव मारू ने भी उपस्थित होकर इस मधुर भागवत कथा का बड़े ही आनंद से रसास्वादन किया ।