BREAKING NEWS
KHABAR : हाजी नईम कुरैशी सर्वसम्मति से चुने गए.. <<     BIG NEWS : महाकाल के दरबार में पहुंचे सुप्रसिद्ध.. <<     KHABAR : कामिका एकादशी पर खाटू श्याम मंदिर में.. <<     KHABAR : दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज प्रदर्शन करेंगे.. <<     NEWS : मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के.. <<     NEWS : नशे को ना, प्रतिभा को हां- युवाओं ने दिया.. <<     NEWS : गोल प्याऊ चौराहे पर वंदन कलश यात्रा का.. <<     VIDEO NEWS: चित्तौड़गढ़ में CBN की बड़ी कार्रवाई, 22.. <<     NEWS : जिला स्तरीय जूनियर ओपन कबड्डी.. <<     NEWS : 11वीं शोभायात्रा एवं प्रतिभा सम्मान समारोह.. <<     KHABAR : आदिवासी बच्चों के सपनों को मिली नई उड़ान,.. <<     NEWS : शहर के पार्कों और प्रमुख मार्गों का होगा.. <<     KHABAR : तिरंगा यात्रा के आह्वान को लेकर करणी सेना.. <<     KHABAR : बृजेश ट्रेडिंग कंपनी पर खाद्य विभाग की.. <<     BIG NEWS : श्रावण में शिवमय उज्जैन, विकास के साथ बढ़ा.. <<     GOLD & SILVER RATE : यहां क्लिक करेंगे तो जानेंगे प्रदेश.. <<     HOROSCOPE TODAY : सिंह और कन्या राशिवालों को करियर में.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
August 29, 2024, 11:06 am
KHABAR : सिंगोली में वाल्मीकि समाज ने धूमधाम से मनाया गोगा नवमी पर्व, छड़ी निशान के साथ कस्बे में निकाला भव्य जुलूस, पढ़े मेहबूब मेव की खबर 

Share On:-

सिंगोली। कस्बे में 28 अगस्त बुधवार को वाल्मीकि समाज की ओर से पहली बार गोगा नवमी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान वाल्मीकि समाज के युवाओं ने गोगा देव महाराज का छड़ी निशान भव्य जुलूस के साथ निकाला। जुलूस देर शाम चौधरी मोहल्ला स्थित अंबेडकर तिराहे से रवाना होकर कस्बे के मुख्य मार्गाे से होता हुआ रात करीब 10 बजे बजरंग व्यायाम शाला पर विसर्जित हुआ। देश में खासकर राजस्थान में गोगा पंचमी के बाद गोगा नवमी का बड़ा महत्व है। क्योंकि भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की नवमी के दिन गोगा देव जी का जन्म हुआ था। गोगा देव जी को राजस्थान में लोक देवता के रूप में मान्यता  है। लोक मान्यता और कथाओं के अनुसार गोगा जी को सांपों के देवता के रूप में पूजा जाता है।
इसलिए गोगा देव जी को प्रतीक रूप से पत्थर या लकड़ी पर सर्प के रूप में उकेरा जाता है।वाल्मीकि समाज के सबसे बड़े पर्व गोगा नवमी पर सिंगोली कस्बे में पहली बार भविष्य जुलूस निकाला गया। इस दौरान वाल्मीकि समाज ने महर्षि वाल्मीकि के चित्र को रथ में सजाया तथा लंबी बस को मोर पंख, रंगीन वस्त्र गोटा आदि से सजाकर गोगा पीर की छड़ी के रूप में कस्बे में घुमाया। वाल्मीकि समाज द्वारा पहली बार निकाले गए गोगा नवमी जुलूस का कस्बे में स्थानीय राजनेताओं और गणमान्य नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। 
बता दे की गोगा देव जी को राजस्थान में मुस्लिम समुदाय द्वारा भी गोगा पीर के रूप में पूजा जाता है। गोगा पीर को जाहरपीर भी कहा जाता है, जाहरपीर की उपाधि उन्हें महमूद गजनवी द्वारा उसे समय दी गई थी,जब उन्होंने गोवंश की रक्षा के लिए साक्षात देवता के रूप में उपस्थित होकर महमूद गजनवी से युद्ध किया था।
रणकपुर प्रशस्ति के मुताबिक गोगा देव महाराज 1024 ईस्वी में भूमि विवाद के चलते अपने चहेरे भाइयों के साथ हुए युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे। बाद में फिरोजशाह तुगलक ने हनुमानगढ़ में उनके मंदिर के रूप में गोगामेड़ी का निर्माण करवाया। गोगामेड़ी को मौजूदा स्वरूप  बीकानेर के महाराजा गंगासिंह ने दिया है। गोगामेडी को हिंदू मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है जहां हर साल व्यापक स्तर पर मेला लगता है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE