चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में चातुर्मासिक प्रवचन करते हुए शांतक्रांति संघ की विदूषी महासती शीलप्रभा ने बताया कि साधक अपने सम्यक ज्ञान दर्शन और चारित्र को निखारता हुआ संयम मार्ग में आगे बढ़ता है तो उसके अंदर प्रतिकूलताओं और अनुकूलताओं में एक समान रहने का गुण होना चाहिए, साथ ही उसे आत्मानंदी बनना चाहिए एवम् पुदगलानंदी बनने का भाव भी मन में नहीं लाना चाहिए तथा अपनी सहनशक्ति को बढ़ाते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर चलते हुए मोक्ष मंजिल मिलने का लक्ष्य पूरा होने तक थकान महसूस नहीं करना चाहिए एवम् संयम जीवन में आने वाले परिषहों से तनिक भी नहीं घबराते हुए आत्म साधना में अडिग बने रहना चाहिए।
इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने कहा कि हमें जिन वचनों में कभी भी शंका नहीं करनी चाहिए एवम् एकांतवादी नहीं बनते हुए अनेकांतवाद को जीवन में अपनाना चाहिए। महासती पुण्यप्रिया ने ठानांग सूत्र के चोथे ठाणे में वर्णित एक लाख योजन के विस्तार वाले जंबूद्वीप, नरकावास एवम् देव विमान बाबत जानकारी दी। धर्म सभा में साध्वीरत्ना राजश्री जी म सा ने विभिन्न प्रत्याख्यान कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। संचालन मंत्री इंद्रेश कोठारी ने किया।