इंदौर। श्री राम कथा में व्यासपीठ पर विराजित कथावाचक- पं.कृष्णकांत शास्त्री ने राम-जानकी विवाह के प्रसंग पर पूरा पंडाल खुशी से झूठ उठा। श्री सोमवंशीय सहस्रार्जुन क्षत्रिय समाज द्वारा मंगल भवन चंद्रभागा पर आयोजित श्री राम कथा में शास्त्री ने कहा कि सीता स्वयंवर पर प्रत्यंचा च़ढ़ाना कोई सरल कार्य नहीं था। राम ने जनकपुर के स्वयंवर में अपनी अदभुत वीरता दिखाई और जिस धनुष को राजा महाराजा हिला नहीं सके, उस धनुष को उठाकर रामजी ने सीता से विवाह किया।
माता सीता ने रामजी के गले में वर माला डालकर उन्हें पति के रूप में स्वीकार किया। राम कथा में सीता की विदाई हुई । उन्होंने कहा कि जनकपुर से जब सीताजी की विदाई हुई तब उनके माता-पिता ने उन्हें ससुराल में कैसे रहना है, इसकी सीख दी। प्रत्येक माता-पिता को अपनी पुत्री के विवाह के समय ऐसी ही सीख देनी चाहिए। कन्या को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे ससुराल व मायका दोनों कुल कलंकित हो। माता सीता ने पूरे जीवन अपने माता-पिता की सीख का पालन किया और जीवन में कष्ट सहन करते हुए भी कोई अनुचित व्यवहार नहीं किया।