नीमच। पिछले दिनों शहर में नगर पालिका द्वारा वर्ष 2008 में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली बुजुर्ग महिला को पट्टा दिया था उस बुजुर्ग विधवा महिला की झोपड़ी को अतिक्रमण के नाम से तोड़ दिया गया। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा। जिसके बाद APCR ने इसे सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को नहीं मानने जिसमें बुलडोजर एक्शन पर बैन लगा हुआ है। शीर्ष अदालत की अवमानना माना और कार्रवाई की बात कही। इधर मुख्य नगर पालिका अधिकारी महेन्द्र वशिष्ठ नीमच ने मामले को रफा दफा करने के लिए लीपा पोती करना शुरू कर दी और उच्च अधिकारियों को गलत जानकारी देकर गुमराह करने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन वास्तिवकता तो यह है की भूमाफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए मात्र स्वच्छता को आधार बनाकर एक गरीब बुजुर्ग महिला की झोपड़ी को तोड़ दिया गया। सवाल इस बात का है कि स्वच्छता के लिए क्या किसी की झोपड़ी को उजाड़ना सही है....?
तो शहर के अंदर सेकडो प्लाट जिनको नगर पालिका ने लीज पर दिए है पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है और व गाजर घास और अन्य जंगली पौधे उगे हुए हैं जिनकी समय समय पर शहर के अन्य क्षेत्रों कालोनियों के निवासियों के द्वारा नगर पालिका को शिकायते भी की गई परन्तु नगर पालिका के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के कानो पर जू तक नही रेंगी और तो ओर नगर पालिका के संपति बंगले बगीचे और खेत की अरबों रुपयों की भूमि पर भूमाफियाओं का कब्जा तो है ही बल्कि अवैध खरीदी बिक्री हुई और भवन भी बने हुए है क्या नगर पालिका ने उन पर कार्रवाई कर कब्जा लिया है...?
सीएमओ महेन्द्र वशिष्ठ का कहना हैं कि पट्टा स्थाई नहीं था तो फिर शहर में सेकडो अस्थाई पट्टे पर प्रधान मंत्री आवास में अनुदान देकर पक्के मकान किस आधार पर बनाए गए वही शहर के अनेकों क्षेत्रों में अस्थाई पट्टे पर पक्के मकान बने हुए आज भी है ।
जबकि हकीकत तो यह है की जिस जगह पर 30 वर्ष से अधिक समय से गरीब विधवा झोपड़ी बनाकर निवास कर रही थी जिसको भूमि का पट्टा भी दिया गया उसके आगे नगर पालिका की खाली भूमि पड़ी है उसको सांठगांठ कर भूमाफियाओं को देना चाहते है उसके लिए एक गरीब विधवा महिला की पट्टे पर बनी झोपड़ी को स्वच्छता और अतिक्रमण के नाम पर जमीदोज किया गया है यह हकीकत है जिसकी शिकायत शासन प्रशासन और सर्वोच्च न्यायालय में की जा रही होने से अपने अपराध को छुपाने हेतु इनके द्वारा शासन प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह किया जा रहा है।
महेन्द्र वशिष्ठ जब से नगर नगर पालिका नीमच में पदस्थ हुए तब से इन द्वारा केवल एक ही काम भूमाफियाओं को नगर पालिका की भूमिया,प्लाट हस्तांतरण का खेल किया जा रहा है जिसकी कई शिकायते लोकायुक्त,प्रमुख सचिव ,आयुक्त नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल,जिला कलेक्टर नीमच को स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगो के द्वारा की गई है इनको शिकायत के आधार पर लोकसभा चुनाव में संभागीय कार्यालय उज्जैन में चुनाव आयोग के आदेश पर आयुक्त नगरीय प्रशासन ने स्थानांतरण न करते हुए अटैच किया था यह चुनाव बाद जुगाड कर अपना अटैचमेंट निरस्त करवाकर पुनः नगर पालिका नीमच में पदस्थ होकर भूमाफियाओं के इशारे पर कार्य कर रहे है यह स्थानीय जनता और शहर के नागरिक भी जानते है।
सीएमओ यह बताए कि शहर के अंदर स्थाई और अस्थाई पट्टे का क्या पैमाना है? क्या मुख्यमंत्री के दिए हुए पट्टे को नगर पालिका को नकारने का अधिकार है? अगर हटाना था तो क्या उनको नोटिस दिया गया? पूर्व पार्षद हारून रशीद कुरैशी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दिल्ली,मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री ,व प्रमुख सचिव ,और उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले और सीएमओ जब से नगर पालिका नीमच में पदस्थ हुए की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग करी गई है।