निंबाहेड़ा। प्रदेश में मिलावटी वस्तुओं पर रोक लगाने के लिए पिछले कई वर्षों से राज्य सरकार लगातार अभियान चलाते आ रही है ताकि आमजन को शुद्ध खाद्य सामग्री मिल सके इसी के तहत अभी प्रदेश में ष्शुद्ध आहार मिलावट पर वारष् अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत प्रदेश के कई शहरों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मिलावटी वस्तुओं पर बड़ी-बड़ी कारवाइयां की है। वहीं इसके उलट निंबाहेड़ा की बात करें तो चित्तौड़गढ़ की स्वास्थ्य टीम द्वारा यहां पर मिलावट को लेकर कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की है।
बस कागजी खानापूर्ति के लिए भले ही छोटी-मोटी करवाई कर दी जाती है । इससे यह प्रतीत होता है कि स्वास्थ्य विभाग के पास कार्रवाई का कोई ठोस आधार नहीं है। अभी दीपावली के मध्यनजर निंबाहेड़ा के कई प्रतिष्ठानों पर बिकने वाली खाद्य वस्तुओं में मिलावट की भरमार रहेगी लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम इसको लेकर सजग दिखाई नहीं दे रही है।
बता दें कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ ताराचंद गुप्ता के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी घनश्याम शर्मा ने अपनी टीम के साथ निंबाहेड़ा में दो-तीन दिन पहले कुछ प्रतिष्ठानों से कुछ खाद्य वस्तुओं के सैंपल लिए गए थे जिन्हें जांच हेतु प्रयोगशाला में भेजा गया है उनकी रिपोर्ट आना भी बाकी है।
इस कार्रवाई को महज खाना पूर्ति ही कहा जाएगा क्योंकि स्वास्थ्य विभाग की टीम आनंन फानन में आती है और उनकी इच्छा अनुसार प्रतिष्ठानों पर सेंपलिंग कार्रवाई की जाती है कार्रवाई के दौरान प्रतिष्ठान संचालक इतने आश्वश्त दिखाई देते हे जिससे ऐसा लगता है कि प्रतिष्ठान संचालक जिस खाद्य वस्तु का नमूना देना चाहते हैं उसी का नमूना स्वास्थ्य विभाग की टीम लेती है।
हाल ही में निंबाहेड़ा हुई जांच करवाई में स्वास्थ्य विभाग की टीम उन मिठाई विक्रेताओं के यहां से भी अवधि पार तथा दूषित सामग्री बरामद नहीं कर पाई जिनके यहां कभी भारी मात्रा में मिठाइयों में मिलाने के केमिकल एसेंस मिले थे।
ऐसा एक भी मिठाई विक्रेता नहीं होगा जिसके यहां पर मिठाइयों में अखाद्य रंग नहीं मिलाया जाता हो फिर भी स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा मिठाइयों में मिलाये जाने वाले अखाद्य रंग पर कभी कोई ध्यान नहीं दिया।
अब इसमें सवाल यह खड़ा होता है कि लिए गए सैंपल में यदि कोई वस्तु मिलावटी निकली तो उसकी रिपोर्ट आने तक उस वस्तु का उपयोग कई लोग कर चुके होंगे उनका क्या होगा।
हालांकि मिलावटी वस्तुओं के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर होने वाला असर आसानी से दिखाई नहीं देता इसी कारण मिलावटी वस्तुओं का व्यापार करने वाले बेख़ौफ़ होकर आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यदि कभी पकड़ में आ भी जाएं तो विभाग की लचर व्यवस्था के चलते नियम व कानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
स्वास्थ्य विभाग की सजगता एक और उदाहरण यह है कि यदि स्वास्थ्य विभाग की टीम इतनी सजग होती तो कार्रवाई के दौरान फूड टेस्टिंग मोबाइल लैब साथ में लेकर आती ताकि हाथों हाथ नतीजा सामने आ जाता।
वहीं दूसरी और नगर के जागरूक नागरिकों के संपर्क में रहकर भी मिलावटी वस्तुओं का भंडाफोड़ कर सकती है लेकिन यहां तो यदि कोई जागरूक नागरिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना देना चाहे तो प्रथम तो वह उनका फोन ही नहीं उठाएंगे और यदि बात हो भी गई हो तो उनके द्वारा बताए गए स्थान पर कभी नहीं पहुंचेंगे।
निंबाहेड़ा में स्वास्थ्य विभाग की टीम इतनी सजग नहीं होने के पीछे क्या कारण है यह समझ से परे हैं पर इसको लेकर आम जन में एक ही विचार आता है कि या तो व्यापारियों के ऊंचे राजनीतिक रसुखातों के चलते उनके खिलाफ कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं होती या फिर स्वास्थ्य विभाग की टीम व व्यापारियों में भी कोई गहरी साठ गांठ है जिसके चलते ष्शुद्ध आहार मिलावट पर वारष् अभियान हवा हवाई हो रहा है।
निंबाहेड़ा में मिलावटी वस्तुओं का कारोबार बड़े पैमाने पर -- उल्लेखनीय की निंबाहेड़ा में मिलावटी वस्तुओं का कारोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है जिसमें मुख्य रूप से कई वर्षों से नकली घी का व्यवसाय करने वाला एक व्यापारी अभी भी इस व्यवसाय में लिप्त होकर नकली घी का व्यवसाय कर रहा है।
इसके अलावा यहां पर भारी मात्रा में नकली मावा आता है इसका उपयोग कई मिठाई विक्रेता चोरी छुपे करते हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम अभी तक इनको पकड़ने में सफल नहीं हो पाई है कभी कभार नकली मावा पकड़ में आ भी जाए तो वह लावारिस हालत में सामने आता है जिसे नष्ट करने के अलावा टीम के पास कोई चारा नहीं होता नष्ट करने के बाद विभाग की टीम द्वारा नकली मावा मंगाने वाले कारोबारी तक पहुंचने का कोई प्रयास नहीं करती इससे यह लगता है कि कदाचित स्वास्थ्य विभाग की टीम किसी दबाव के चलते मामले को रफा दफा कर देती है।
मिलावटी वस्तुओं की यदि बात करें तो निंबाहेड़ा में कई शॉपिंग मॉल ऐसे हैं जहां पर अवधि पार खाद्य सामग्री तथा कई ढाबों व होटलों पर भी दूषित खाद्य सामग्री मिल सकती है।
इसी क्रम में खाद्य तेल, बेसन, मैदा, मिर्ची, हल्दी, नमकीन आदि में मिलावट की संभावना को इनकार नहीं किया जा सकता।