भोपाल। क्षेत्रीय रूपक महोत्सव के समापन सत्र में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। संस्कृत नाटकों की प्रासंगिकता को उजागर करने के उद्देश्य से आयोजित महोत्सव में कुल छह नाटकों का मंचन हुआ। समापन सत्र की अध्यक्षता भोपाल परिसर के निदेशक प्रो. रमाकांत पांडेय ने की।
प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार लखनऊ परिसर के आयुष मिश्रा को और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भोपाल परिसर की साक्षी रैना को दिया गया।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर द्वारा प्रस्तुत नाटक श्पल्लीकमलश् ने बच्चों और परिवार के रिश्तों की महत्ता को बेहतरीन तरीके से पेश किया। वहीं, लखनऊ परिसर ने श्नेतॄलीलायतश् के जरिए राजनीति और नेतृत्व के परिपेक्ष्य में सामाजिक मुद्दों पर गहरी सोच उत्पन्न की।
इसके अलावा, नागपुर महाराष्ट्र और हरियाणा विद्यापीठों ने अपने नाटकों के माध्यम से नारी अस्मिता, अपसंस्कृति और भारतीय परंपरा को बढ़ावा देने का प्रयास किया। रक्तदान के महत्त्व को उजागर करने वाला नाटक श्महादानम्श् भी दर्शकों के बीच विशेष चर्चित हुआ।
समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. नीलाभ तिवारी ने किया और संचालन डॉ. शीतांशु त्रिपाठी ने किया। इस आयोजन के विजेता आगामी फरवरी में भोपाल में होने वाले अखिल भारतीय रूपक महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देंगे।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर के निदेशक प्रोफेसर रमाकांत पांडेय ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी प्रतिभागियों को बधाई दी और कहा कि ष्प्रतिभागिता ही सबसे महत्वपूर्ण होती है, और इस महोत्सव में शामिल हर प्रतिभागी ने इसे अपने कठिन परिश्रम से जीवंत किया।
प्रेरक नाटकों ने किया मंत्रमुग्ध
महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को 5 नाटकों का मंचन किया गया। विकसतु एषा कलिका नाटक कवि कुलगुरू कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय ,नागपुर महाराष्ट्र द्वारा प्रस्तुत किया गया । नारी अस्मिता पर केंद्रित इस रूपक में स्त्रियों को साहसी होने और निर्भय जीवन जीने की प्रेरणा दी गई। वहीं हरियाणा संस्कृत विद्यापीठम,बाघोला, हरियाणा द्वारा प्रस्तुत प्रतिभा परीक्षण रूपक में वर्तमान समय के बच्चों को अपसंस्कृति के दुष्प्रभाव से बचाते हुए भारत के गौरवशाली परंपरा व संस्कृति का ज्ञान देने के चिंतन की बात कही गई। पद्मश्री त्रिवेणी कवि अभिराज राजेंद्र मिश्र द्वारा लिखित इस एकांकी नाटक ने समस्त छात्रों को आत्म परीक्षण हेतु विवश कर दिया।
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नव देहली ने रक्तदान को महादान बताने वाले महादानम् रूपक की प्रस्तुति दी ।कृषक जीवन की विडंबना को मंच पर सजीव करते हुए इस नाटक ने मानवीय मूल्यों को परिभाषित करते हुए रक्तदान को महादान बताया।
केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर ने विंधेश्वरी प्रसाद मिश्र, विनय द्वारा रचित नेतॄलीलायत नामक नाटक की प्रस्तुति दी। नेता द्वारा जनता को किस प्रकार अपने वश में किया जाता है, उन्होंने प्राचीन पारंपरिक ताने-बाने में इस विषय को उपस्थापित किया। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल परिसर ने रमा चौधरी द्वारा रचित पल्लीकमल नाटक की प्रस्तुति दी। इस नाटक में भी पुत्री संतान की महत्ता व माता-पिता के साथ उसके प्रेमिल रिश्तों पर चर्चा करते हुए वर चयन की बात कही गई है।