नीमच। श्री कृष्ण का जन्म जेल में होना संसार को यह संदेश देता है कि सकारात्मक सोच हो तो कठिन से कठिन लक्ष्य को सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। वक्षासुर वध संसार को यह संदेश देता है कि परमात्मा की प्राप्ति के लिए मन की चंचलता को त्यागना होगा। मन में समर्पण भाव से परमात्मा को याद करना होगा तभी परमात्मा की प्राप्ति होती है। सकारात्मक सोच हो तो सफलता अवश्य मिलती है।यह बातश्री पंचमुखी बालाजी मंदिर कानाखेड़ा के तत्वाधान में आयोजित धर्म कथा में बाबा विश्वनाथ गुरुकुलम उजडखेडा उज्जैन के व्याकरणाचार्य रामानंद पुरी जी महाराज ने कही। वे पंचमुखी बालाजी के दशम स्थापना दिवस एवं मकर सक्रांति के पावन उपलक्ष्य में पंचमुखी बालाजी मंदिर भक्ति पांडाल में आयोजित श्री मद्भागवत कथा एवं अखंड रामायण पाठ के आयोजन धर्म कथा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संसार में भगवान के भक्त का पद सबसे ऊंचा होता है। अच्छे पुण्य विचारों का चिंतन करेंगे तो अच्छे कर्म से ही जुड़ेंगे और हमारे जीवन में सदैव अच्छा ही अच्छा पुण्य कर्म ही बढ़ेगा। मनुष्य कभी एक भी बार पाप कर्म की गलती नहीं करें नहीं तो एक गलती को छुपाने के लिए 99 झूठ बोलना पड़ते हैं इसलिए मनुष्य को सदैव अच्छे पुण्य कर्म और परमार्थ सेवा कार्य करना चाहिए तभी हमारे जीवन का कल्याण हो सकता है। मनुष्य को अच्छे लोगों की संगत करना चाहिए । अच्छे लोगों की संगत का फल अच्छा होता है। पाप करने वाले अजामिल ने साधु संतों की प्रेरणा से अपने पुत्र का नाम नारायण रखा और जीवन पर्यंत नारायण नारायण का नाम लिया तो उसके जीवन का कल्याण हो गया था। इसलिए हमें भी बच्चों के नाम भगवान के नाम पर ही रखना चाहिए ताकि हमारा भी कल्याण हो जाए। धार्मिक सेवा कार्यों के लिए अपने कर्म की बोली लगाएंगे तो हमें संसार में कहीं भी बोली नहीं लगानी पड़ेगी। धार्मिक बोली पाप के प्रायश्चित समान होती है। पुण्य कर्म का फल हजार गुना होकर वापस मिलता है इसलिए सदैव पुण्य कर्म करते रहना चाहिए।
यदि हम पाप कर्म करेंगे तो हमें पशु योनि में जन्म लेना पड़ेगा पशु योनी नरक के समान होती है।
परिवार का अर्थ परेशानी में रहते हुए संघर्ष के साथ सत्संग भक्ति भी करते रहना होता है। नाचने गाने से कभी भगवान नहीं मिलता है। जिसने जीवन को तपस्वी की तरह बना लिया उसका जीवन सदैव सफल होता है। श्री मद्भागवत कथा हमें परिवार में रहते हुए त्याग का संदेश देती है।जिसको भगवान पर भरोसा नहीं होता है वह कथा का व्यापार करता है कथा का व्यापार पाप कर्म के समान होता है। सत्यवादी हरिश्चंद्र को भी धरती पर परेशानी का सामना करना पड़ा था सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं होता है। इसलिए सभी को सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए तभी जीवन का कल्याण होता है। आत्मा से परमात्मा के मिलन का नाम रास होता है।
भारत में इतने महान ऋषि मुनि थे कि भारत विश्व गुरु कहलाता था। शास्त्र स्पष्ट बोलता है। संत अच्छा मार्ग दिखाता है। सत्संग अवगुण दिखाता है। दर्पण सच्चाई दिखाता है। संत्संग के पुरुषार्थ से पाप पुण्य में, तथा कर्म धर्म में बदल जाता है। राजा परीक्षित ने 7 दिन तक श्रीमद् भागवत का सत्संग सुना और अपने जीवन के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया था जो आज भी आदर्श प्रेरणादाई प्रसंग है। जहां भागवत कथा और सत्संग होते हैं वह स्थान कुम्भ तीर्थ हो जाता है। जिस देश में भ्रष्टाचार होता है वहां सत्य असत्य हो जाता है।जो जवानी में भक्ति करता है उसकी बुढ़ापा सुख में बितता है।
महाराज श्री ने हिरणा कश्यप, भक्त प्रह्लाद, राजा परीक्षित, नरसिंह अवतार ,मत्स्य अवतार, कश्यप ऋषि, मान्धाता, ओंकारेश्वर, समुंद्र मंथन,यज्ञ ,गजकथा, धन्वंतरि,मोहनी अवतार श्री राम जन्म,चित्रकुट, पंचवटी, गुरु,वैद कर्म, उपासना,महाप्रलय, आदि धार्मिक प्रसंगों का वर्तमान परिपेक्ष्य में महत्व प्रतिपादित किया।
श्री मद् भागवत पोथी पूजन आरती में प्रतापगढ़ के पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष धनराज मेनारिया,
अखिल भारतीय मेनारिया समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज मेनारिया के पिता मांगीलाल मेनारिया, शंकर लाल मेनारिया, धनराज मेनारिया निकुंभ, राधेश्याम मेनारिया व बाबूलाल नागदा काना खेड़ा,सहित बड़ी संख्या में मेवाड़ मालवा अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों के बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे। सभा का संचालन दशरथ नागदा ने किया।श्री मद्भागवत कथा 8 से 14 जनवरी तक प्रतिदिन सुबह11 से 4बजे तक आयोजन किया जा रहा है। 14 जनवरी को पूर्णाहुति भंडारे के साथ कथा का विश्राम होगा। भागवत पोथी पूजन आरती के बाद प्रतिदिन प्रसाद वितरण किया जायेगा।
श्री कृष्ण जन्म में झूमे श्रद्धालू-
भागवत कथा के मध्य महाराज श्री ने जब श्री कृष्ण जन्म का प्रसंग बताया तो भक्ति पंडाल में श्रद्धालु भक्तों द्वारा जय जय श्री कृष्ण व आलकी की पाल की जय कन्हैया लाल की की जय घोष लगाई और श्रद्धालु झूम उठे।