नीमच। सनातन संस्कृति के संस्कारों के कारण ही परिवार में प्रेम रहता है।संस्कारों से व्यक्ति की पहचान होती है। संस्कार से ही व्यक्ति सफलता की शिखर की और अग्रसर होता है।सनातन संस्कृति के संस्कार के बिना शिक्षा का ज्ञान अधूरा होता है। यह बातश्री पंचमुखी बालाजी मंदिर कानाखेड़ा के तत्वाधान में आयोजित धर्म कथा में बाबा विश्वनाथ गुरुकुलम उजडखेडा उज्जैन के व्याकरणाचार्य रामानंद पुरी जी महाराज ने कही। वे पंचमुखी बालाजी के दशम स्थापना दिवस एवं मकर सक्रांति के पावन उपलक्ष्य में पंचमुखी बालाजी मंदिर भक्ति पांडाल में आयोजित श्री मद्भागवत कथा एवं अखंड रामायण पाठ के आयोजन धर्म कथा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भागवत श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगाश्रवण करने से मन पवित्र होता है। भागवत में नाच गान कुरिती है। इससे धर्म में विकृति बढ़ रही है।
भागवत श्रवण कर मन को पवित्र करने का माध्यम बनाना चाहिए।
धर्म की विकृतियों के कारण ही भारत का विभाजन हुआ। धर्म विभाजित हुए थे इसी कारण देश का विभाजन हुआ था। प्राचिनकाल के संदेशों को वर्तमान परिपेक्ष्य में परिवर्तन के साथ समझना चाहिए। देश की आजादी में अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मंगल ग्रह में जीव की खोज जारी है। महाभारत युग का कालखंड अलग था आज परिस्थितियां अलग है इसलिए परम्पराओ में भी परिवर्तन कर सुधार करना चाहिए। श्री कृष्ण ने जरासंध को युद्ध में 17 बार पराजित किया। हार ही असली जीत होती है।हार के साथ लगातार मुकाबला करते हुए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए सफलता एक दिन हमारे कदमों में होती है। जहां कभी युद्ध नहीं होता है वही अयोध्या होती है। युद्ध का अर्थ छल कपट धोखाधड़ी से होता है। संघर्ष व युद्ध
अंतिम समय संघर्ष करना चाहिए। सफलता अवश्य हमारे कदमों में होती है। भारत में आठ प्रकार से विवाह की प्रचलित है। परमात्मा की भक्ति के प्रेम में व्यक्ति को होश नहीं रहता है वह शून्य हो जाता है। वियोग में प्रेम पुष्प पल्लवित होता है। श्रीमद् भागवत कथा भगवान का साक्षात स्वरूप है भागवत के प्रत्येक शब्द में परिवर्तन निहित होता है। श्री कृष्ण ने मथुरा में कुब्जा व धोबी का कल्याण किया था। परिजनों की मृत्यु पर रोना नहीं चाहिए। भक्ति सत्संग करना चाहिए ताकि करने वाले की आत्मा को शांति मिल सके। गुरु दक्षिणा
श्री कृष्ण रुक्मणी का विवाह आत्मा और परमात्मा का विवाह होता है।भागवत पोथी पूजन आरती में पुर्व कृषि उपज मंडी अध्यक्ष राजू निरंजन तिवारी,चन्दा देवी भुपेंद्र शर्मा मंदसौर, देवीलाल शर्मा, अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
श्री मद्भागवत कथा 8 से 14 जनवरी तक प्रतिदिन सुबह11 से 4बजे तक आयोजन किया जा रहा है। 14 जनवरी को पूर्णाहुति भंडारे के साथ कथा का विश्राम होगा। भागवत पोथी पूजन आरती के बाद प्रतिदिन प्रसाद वितरण किया जायेगा।
इनका किया सम्मान-
कथा के मध्य न्यूरो थेरेपी चिकित्सा के माध्यम से निःशुल्क चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. प्रदीप राव मराठा, दीपिका बोरासी, ज्योति राठौड़, चंचल बैरागी, को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
रुक्मणी विवाह प्रसंग पर श्रद्धालु झूम उठे-
भागवत कथा के मध्य जब श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग बताया तो श्रद्धालु भक्तों ने जय जय श्री कृष्ण की जय घोष लगाई।और श्रद्धालु भक्त झुम उठे।