शिवपुरी। मध्य प्रदेश में बीजेपी जिला अध्यक्षों की सूची आने लगी है। भाजपा ने अब तक 20 जिलों के अध्यक्षों का ऐलान कर दिया है। इसे लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। दरअसल, शिवपुरी जिला अध्यक्ष को लेकर बीजेपी विधायक ने ही आपत्ति दर्ज की है। शिवपुरी जिलाध्यक्ष की चर्चा इसलिए भी हो रही है कि इसके लिए बीजेपी ने अपना संविधान बदल दिया।
शिवपुरी के करेरा विधानसभा से बीजेपी विधायक रमेश खटीक ने कहा कि जसवंत जाटव के नाम को लेकर मैंने आपत्ति दर्ज कराई थी। कहा था कि कोई ऐसा व्यक्ति जिला अध्यक्ष बने जिसकी छवि साफ हो और वह सबको साथ लेकर चले। जसवंत जाटव ने तो चुनाव के दौरान मेरा खुलकर विरोध किया है। इसका प्रमाण मेरे पास है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
शिवपुरी जिलाध्यक्ष की नियुक्ति पर कांग्रेस ने सवाल उठाए है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि बीजेपी में कोई संविधान नहीं है। यहां एक ही संविधान है, वो है नेता३ नेताओं के चहेते अध्यक्ष बने हैं।
कौन है जसवंत जाटव
जसवंत जाटव, ज्योतिरादित्य सिंधिया से जुड़े उन विधायकों में शामिल है, जिन्होंने कांग्रेस की सरकार पलटने में सिंधिया के साथ विधायकी से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि वह चुनाव लड़ने के बाद दोबारा विधायक नहीं बन सके थे, लेकिन उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्ज दिया गया था। अब भले ही बीजेपी की गाइडलाइन के अनुसार, उन्हें पार्टी में 6 साल न हुए हो, लेकिन सिंधिया के करीबी होने के चलते उन्हें बीजेपी ने जिला अध्यक्ष का पद दे दिया है।
क्या है बीजेपी की गाइडलाइन
बीजेपी जिला अध्यक्ष के लिए 6 साल से पार्टी का सक्रिय सदस्य होना जरूरी है। जसमंत जाटव मार्च 2020 में आए थे। ऐसे में उन्हें पार्टी में आए हुए 4 साल से अधिक का वक्त हुआ। कथित रूप से ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी होने की वजह से पार्टी ने उन्हें जिलाध्यक्ष का पद दे दिया। अब सियासी गलियारे में यह चर्चा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए पार्टी के संविधान को शिथिल कर दिया गया है।