सीहोर। मकर संक्रांति का पावन पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। नर्मदा नदी के आंवली घाट पर सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। जहां लोग पुण्य स्नान कर रहे हैं और विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। श्रद्धालु तिल और गुड़ से बनी मिठाई का प्रसाद भी चढ़ा रहे हैं।
इस साल का मकर संक्रांति पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि 28 साल के बाद एक दुर्लभ योग में सूर्य उत्तरायण हो रहा है। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित गणेश शर्मा के अनुसार, 14 जनवरी मंगलवार को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। यह वह समय है जब देश के विभिन्न हिस्सों में यह त्योहार अलग-अलग नामों से मनाया जाता है - दक्षिण भारत में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण और पंजाब में लोहड़ी के रूप में।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व भी अत्यंत है। मान्यता है कि इसी दिन गंगा जी भगीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए सागर में मिली थीं। इसी कारण गंगासागर में विशेष मेला लगता है। दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला पोंगल चार दिनों तक चलता है, जिसमें भोगी, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल और कन्नुम पोंगल शामिल हैं। यह पर्व राजा बली को समर्पित है और सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है।