मनासा। वैधानिक रूप से देय 5 वर्ष की बजाए लगभग 9 प्रतिशत वर्ष में किए गए न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण का प्रदेश के लाखों श्रमिकों व कर्मचारियों को अब तक भुगतान न होना दुर्भाग्यजनक है।
यह सही है कि इसका भुगतान माननीय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ इंदौर द्वारा दिए गए स्थगन आदेश से रुका था। इस संबंध में हुई कानूनी लड़ाई में हमारा संगठन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन मध्य प्रदेश राज्य समिति भी हस्तक्षेपकर्ता (इंटरवीनर) के रूप में शामिल था। इस कानूनी लड़ाई के परिणाम के रूप में 3 दिसंबर 2024 को माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने स्थगन आदेश सभाप्त कर 1 अप्रैल 2024 से बड़ी दरों के भुगतान करने का रास्ता प्रशस्त कर दिया।
लेकिन दुखद पहलू यह है कि 3 दिसंबर के बाद एक माह से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी जब आदेश जारी नहीं हुआ तो हमारे संगठन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन राज्य ममिति ने 6 जनवरी 2025 को श्रम विभाग के प्रमुखों को न्यायालय की अवमानना का कानूनी नोटिस दिया। इसके बाद 8 जनवरी 2025 को मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय से आपको कानूनी अभिमत भी मिल गया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि बढ़ी दरों का भुगतान 1 अप्रैल 2024 से किया जाना है। इतने स्पष्ट अभिमत के बाद भी बड़ी हुई दरों के भुगतान संबंधी आदेश आपके कार्यालय द्वारा जारी नहीं हुए। इससे पूरे प्रदेश में लाखों श्रमिकों में भारी असंतोष पैदा हो रहा है।
उपरोक्त स्थिति में हमारा आग्रह है किः-
1. माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के विषय में महाधिवक्ता के स्पष्ट अभिमत मिल जाने के बाद की स्थिति में,
1 अप्रैल 2024 से बड़ी हुई दरों को एरियर सहित भुगतान संबंधी आदेश तुरंत जारी किया जाए।
2. इस आदेश के साथ श्रम विभाग के मैदानी अमले के लिए एक विशेष परिपत्र जारी कर एरियर सहित भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये जावे।
3. ग्राम पंचायत में कार्यरत नल चालक एवं भर्त्य को भी न्यूनतम वेतन दिया जाए।
यदि यथाशीघ्र उपरोक्त आदेश जारी नहीं किए गए तो हमारा संगठन न केवल न्यायालय के अवमानना की कानूनी कार्रवाई शुरू कर देगा बल्कि श्रमायुक्त कार्यालय पर डेरा डालो घेरा डालो आंदोलन करने के लिए भी मजबूर होगा।