भोपाल। वर्तमान भारत में मंदिरों के प्रति लोकप्रियता बढ़ी है। इससे भारतीय संस्कृति का पुनर्जागरण निश्चित ही होगा। इसमें कोई संदेह नहीं है। यह बात राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने कही। वे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल में कठपुतली निर्माण कार्यशाला के तहत ष्सम्प्रति भारतीय संस्कृति का पुनर्जागरणष् विषय पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।
स्वामी विवेकानंद, बाल गंगाधर तिलक पर चर्चा और श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों को उद्धृत करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि वर्तमान में भारतीय सांस्कृतिक शक्ति के विभिन्न उदाहरण दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैसे पाश्चात्य अनुवादकों ने गलत अनुवाद किए हैं। सनातन संस्कृति एवं देवी-देवताओं को गलत तरीके से अनूदित किया है। ज्ञान हमारा सामुदायिक, सामाजिक परंपरा रहा है। ज्ञान का लोक तक संचरण होता था।
13 अगस्त 2014 को डॉ. वीके गुप्ता ने टीकेडीएल (पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी) की स्थापना की। भारत अपनी बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूक हुआ। इसके बाद भारतीय बौद्धिक संपदा का पेटेंट कराना। टीकेडीएल ने पाश्चात्यों द्वारा कराया जा रहा विभिन्न औषधियों का पेटेंट रुकवाया। इससे स्वदेशी विज्ञान का जागरण हुआ।
श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीयता ने अपने आपको स्थापित करना आरंभ कर दिया है। संपूर्ण विश्व को भारत ने योग दिया। चरक सुश्रुत आदि ने आयुर्वेद प्रदान किया। परिसर के निदेशक प्रो. रमाकांत पाण्डेय ने कहा कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा को नीचा दिखाने के लिए पाश्चात्यों का षड्यंत्र बहुत पुराना है।
चलचित्रों में भी कर्मकांड कराने वाले आचार्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। भोपाल परिसर के सह-निदेशक प्रो.नीलाभ तिवारी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। संचालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. दाताराम पाठक ने किया। कठपुतली निर्माण कार्यशाला में प्रशिक्षण देने के लिए अहमदाबाद से प्रशिक्षक रमेश रावल एवं आदित्य राजझाला आए हुए हैं।