उज्जैन। 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ के लिए मध्य प्रदेश के 15 सीनियर अफसरों की टीम प्रयागराज संगम में यूपी के अधिकारियों के साथ स्टडी कर लौटी है। यह अध्ययन तीन साल बाद उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ के लिए किया गया।
शुक्रवार को उज्जैन एसपी और कलेक्टर के साथ अन्य अधिकारियों का एक दल भी प्रयागराज पहुंचा। अधिकारियों ने प्रयागराज की डिजास्टर टीम, वॉच टावर, हैदराबाद में प्रशिक्षित 200 गोताखोर, रिवर पुलिस, और उज्जैन में ष्होल्ड एरियाष् बनाने पर चर्चा की।
प्रयागराज कुंभ में 40 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए की गई क्राउड मैनेजमेंट और अन्य व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए मध्य प्रदेश के 15 सदस्यीय दल ने तीन दिन तक वहां वीडियो, फोटो, और अन्य दस्तावेजों के जरिए जानकारी ली।
मध्य प्रदेश की टीम लीड करने की जिम्मेदारी एडीजी रैंक के सीनियर आईपीएस अफसर उमेश जोगा को दी गई है। टीम में उज्जैन संभाग के कमिश्नर संजय गुप्ता, डीआईजी उज्जैन नवनीत भसीन, और डीआईजी पीएचक्यू तरुण नायक ने इंटेलिजेंस व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
एसपी राहुल लोढ़ा ने रेलवे से जुड़ी व्यवस्थाओं का अध्ययन किया। इसके अलावा, आईपीएस हितेश चौधरी, एएसपी साइबर सेल उज्जैन, उदय सीओ संदीप सोनी और अन्य अधिकारी भी शामिल थे।
ट्रैफिक-क्राउड मैनेजमेंट पर फोकस
एडीजी उमेश जोगा ने बताया कि 2028 के सिंहस्थ के लिए सबसे अधिक ध्यान ट्रैफिक और क्राउड मैनेजमेंट पर रहेगा। प्रयागराज में भीड़ प्रबंधन के लिए जिस दिशा से भीड़ आती है, उसके अनुसार अलग-अलग घाट बनाए गए हैं। जैसे, लखनऊ से आने वाली भीड़ के लिए अलग घाट और मध्य प्रदेश से आने वाली भीड़ के लिए अलग घाट हैं।
उज्जैन में 40 हजार पुलिसकर्मी तैनात होंगे
प्रयागराज में कुंभ के दौरान पुलिसकर्मियों के ठहरने के लिए टेंट बनाए गए है, लेकिन इस बार उज्जैन में स्थायी निर्माण किए जाएंगे जो भविष्य में भी काम आएंगे। 2016 के सिंहस्थ में 22 हजार पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन 2028 के सिंहस्थ में 40 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी विकसित किया जाएगा।
कुंभ के नाम पर हो रहे फ्रॉड्स पर भी स्टडी
एडीजी उमेश जोगा ने बताया कि कुंभ मेले में होटल रूम और कॉटेज के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े को रोकने के लिए यूपी सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उसी तरह के उपाय उज्जैन सिंहस्थ में भी लागू किए जाएंगे। खोया-पाया केंद्रों में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग प्रयागराज में किया गया है, जिसे उज्जैन में भी लागू किया जा सकता है।