नीमच। प्रशासन की अनदेखी के चलते कृश्णावली नदी प्रदुशण की वजह से नाले में तब्दील होती जा रही है। इसका गहरीकरण करने के बजाए नगरपालिका दुर्गा-गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन करवा रही है, जिससे इसमें गाद जमती जा रही है, वहीं दूसरी ओर इसमें गंदे नाले मिल रहे हैं, जिससे नदी का पानी भयंकर सडांध मार रहा है। प्रशासन को चाहिए कि बघाना व रेल्वे का गंदा नाला नदी से हटाकर अन्य जगह मिलावे व नदी का गहरीकरण करावें। यदि इस दिशा में शीघ्र कदम नहीं उठाए गए तो जन आन्दोलन के लिए मजबूर होना पडेगा।
उक्त आशय के बयान जारी करते हुए शिवघाट सेवा समिति के मनोहरलाल गोयल ने बताया कि शिवघाट पर पहले नदी में लोग स्नान, पूजा-अर्चना करने आते थे। महिलाएं कार्तिक स्नान करने व कार्तिक पूर्णिमा पर दीप विसर्जन करने आती हैं। नगरवासी ग्यारहवां करने शिवघाट पर आते हैं, लेकिन प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही के चलते नदी गंदे नाले में तब्दील हो गई है। इसकी गाद निकालकर गहरीकरण करने के बजाए नगरपालिका इसमें प्रतिमा विसर्जन करवा रही है। नदी में बघाना व रेल्वे स्टेशन का गंदा नाला मिल रहा है, जिससे यह और अधिक प्रदूशित हो गई है जिससे नदी का पानी भयंकर सडांध मार रहा है। समय रहते ध्यान देने की जरूरत है।
चिंता की बात यह है कि जिस नदी में 12 महीने स्वच्छ जल उपलब्ध होता था, इसके तट पर नहाने और कपड़े धोने जैसी जरूरतें पूरी होती थी। आज वहां नाली का गंदा बदबूदार पानी नदी की ओर गिर रहा है। पनघट खत्म हो गए हैं, नदी किनारे के पेड़ उजड़ गए हैं और सौंदर्यीकरण के नाम पर नदी के एक किनारे पर सीमेंट कांक्रीट की दीवार खड़ी कर दी गई है। अब ना तो नदी के घाटों पर नहाने वालों का मेला जुटता है और ना पनिहारिनों की आवाज सुनाई पड़ती है।
पूर्व में इस नदी में नहाने के कई घाट बने हुए थे, जिन्हें नगरपालिका ने बंद करवा दिया है। नगरपालिका को चाहिए कि बघाना व रेल्वे का गंदा नाला नदी से हटाकर अन्य जगह मिलावे व नदी का गहरीकरण करावें। शहर की प्राचीन कृश्णावली नदी के गहरीकरण की मांग क्षेत्रवासी लम्बे समय से करते चले आ रहे हैं, लेकिन नगरपालिका प्रशासन द्वारा अब तक इस पर ध्यान नहीं दिया गया है। कई बार प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया गया है, अब यदि शीघ्र ही नदी का गहरीकरण और गंदे नालों को बंद नहीं किया गया तो जन आन्दोलन के लिए बाध्य होना पडेगा।
नदी में मिल रहा गंदा पानी-
स्थिति ये बन गई है कि सालों से इस नदी में नालों का पानी मिल रहा है। शिवघाट, सत्यनारायण मंदिर, शंभू व्यायामशाला, सेन समाज मंदिर, लखेरा समाज मंदिर सहित कई अन्य धार्मिक स्थल हैं, जिनके दर्शन के लिए प्रतिदिन सैंकडों श्रद्धालु आते हैं, जो सडांध मारते पानी की बदबू के कारण प्रशासन को कोसने को मजबूर हैं।