BREAKING NEWS
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन देने के.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मन्दसौर.. <<     KHABAR : नीमच जिले में हिमांशु चंद्रा के निर्देशन.. <<     KHABAR : जनकल्याण शिविर में ग्रामीणों को मिली.. <<     वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन देने के.. <<     NMH MANDI : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी नीमच के.. <<     REPORT : सभी विभागीय मानकों पर प्रदेश में शीर्ष.. <<     NEWS : शहर के विभिन्न स्थानों पर राहगीरों की.. <<     NEWS : ग्राम पंचायतों में योग कार्यक्रमों के लिए.. <<     NEWS : चित्तौड़गढ़ में महेश नवमी महोत्सव 2026 का.. <<     NEWS : मुख्यमंत्री दिव्यांग स्कूटी योजना 2026,.. <<     KHABAR : नामांकन निरस्तीकरण के विरोध में कांग्रेस.. <<     वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन देने के.. <<     KHABAR : सर्पदंश से मृत किसान के परिवार की मदद को.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     BIG NEWS : तस्करों की नई चाल बेनकाब, प्याज के कट्टों.. <<     वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन देने के.. <<     KHABAR : आग ने निगली गेहूं की फसल, पलभर में राख हुई.. <<     KHABAR : उज्जैन में चल रही ट्रैक्टर टोचन.. <<     KHABAR : मतदाता सूची पुनरीक्षण शुरू, चुनाव आयोग ने.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
March 8, 2025, 10:54 am
KHABAR : संघर्ष, साहस और सपनों की उड़ान, दिव्यांग रेणु की प्रेरक कहानी, जिसने ठानी जीत की, वही मिसाल बन गई, पढ़े दशरथ नागदा की खबर

Share On:-

कुकड़ेश्वर। सागर की रहने वाली रेणु ठाकुरकृएक नाम, जो हिम्मत और संघर्ष की मिसाल बन गया। जन्म से दिव्यांग रेणु जुड़वा भाई-बहन में से एक थीं। भाई स्वस्थ था, लेकिन रेणु के हिस्से में आई शारीरिक चुनौतियाँ। समाज ने उसे बेबस समझा, तानों की बारिश की, लेकिन रेणु ने अपनी तक़दीर खुद लिखने की ठानी।

छह साल की मासूम उम्र में जब बच्चे खिलौनों से खेलते हैं, तब रेणु ने एक सपना देखाकृकलेक्टर बनने का। यह सपना एक दिव्यांग लड़की का था, जिसे बार-बार कहा जाता, कब तक पढ़ेगी? क्या बुढ़ापे तक किताबों में ही सिर गड़ाए रखेगी? लेकिन रेणु ने जवाब दिया अपने संघर्षों से, अपनी मेहनत से।

सपनों पर भारी समाज की बेड़ियाँ, लेकिन परिवार बना ढाल-
रेणु का परिवार मध्यमवर्गीय था। पिता सरकारी नौकरी में थे, जबकि माँ एक गृहिणी थीं। दो बड़े भाई थे, जिन्होंने कभी उसे यह महसूस नहीं होने दिया कि वह किसी से कम है। जब समाज के ताने उसकी हिम्मत तोड़ने की कोशिश करते, तब घर में माँ और भाई उसकी ताकत बनकर खड़े रहते। माँ ने दोस्त बनकर बेटी के साथ हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाया और विश्वास दिलायाकृष्तू उड़ सकती है, बस अपने हौसलों को मत टूटने देना।ष्

लेकिन जीवन इतना आसान नहीं था। कोरोना काल में जब पूरा देश लॉकडाउन में था, तब रेणु के जीवन में एक और परीक्षा आई। एक दिन माँ ने सर्दी में राहत देने के लिए उबलता हुआ पानी एक बोतल में दिया, लेकिन गलती से वह पानी उसके पैरों पर गिर गया। जला हुआ पैर दर्द से तड़प उठा। अस्पताल तक जाने का कोई साधन नहीं था, डॉक्टर भी घर नहीं आ सकते थे। एक स्थानीय डॉक्टर ने जैसे-तैसे पट्टी की, लेकिन घाव ठीक होने में एक साल लग गया। दर्द असहनीय था, लेकिन हार नहीं मानी।

आत्महत्या का ख्याल और बचपन की दोस्त की सीख-
संघर्षों की आंधी में कभी-कभी इंसान हिम्मत हार जाता है। एक दिन ऐसा भी आया जब रेणु के दिल में यह सवाल उठा- मैं कब तक दूसरों के सहारे जिंदगी गुजारती रहूंगी? मन में निराशा घर कर गई, और उसने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। जब वह आत्महत्या करने वाली थी, तभी उसकी बचपन की दोस्त आई। उसने दरवाजा खटखटाया, रेणु ने दरवाजा खोला और अपने दिल की पीड़ा बताई। दोस्त ने हाथ थामा और कहा- हिम्मत मत हार, तू खुद एक मिसाल बन सकती है।

यह वो मोड़ था जिसने रेणु को फिर से खड़ा कर दिया। उसने खुद से वादा किया कि चाहे जितनी मुश्किलें आएं, वह अपने सपने को पूरा करेगी।

सपनों की उड़ान-
आज वही रेणु ठाकुर रामपुरा महाविद्यालय में अतिथि विद्वान के रूप में पढ़ा रही हैं। उनके साथ एक असिस्टेंट कुमकुम हमेशा रहती हैं, लेकिन यह सहारा अब कमजोरी नहीं, ताकत है। रेणु ने अपने सपनों को मरने नहीं दिया।

80 प्रतिशत दिव्यांग होने के बावजूद, चलने-फिरने में अक्षम होने के बावजूद, हाथों का पूरा साथ न मिलने के बावजूद रेणु आज सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य को संवार रही हैं। लेकिन उनकी मंज़िल अभी दूर है। उनका सपना आज भी वही है कलेक्टर बनने का।

हार नहीं मानूंगी-
रेणु कहती हैं, जीवन में कई बार ऐसा लगा कि अब सब खत्म हो गया, लेकिन हर बार मैंने खुद को उठाया। मेरा शरीर भले ही कमजोर हो, लेकिन मेरा हौसला पहाड़ से भी ऊँचा है। मैं कलेक्टर बनूंगी, समाज की सोच बदलूंगी और हर उस बेटी को हिम्मत दूंगी, जो कभी खुद को कमजोर समझती है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर रेणु की यह कहानी उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो समाज की बेड़ियों को तोड़कर अपने सपनों की उड़ान भरना चाहती हैं। रेणु ने साबित कर दिया शरीर भले ही सीमित हो, लेकिन हौसले की उड़ान असीमित होती है। कमजोर शरीर पर मन बलवान हैं, दिव्यांगता अभिशाप नहीं वरदान हैं।
 

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE