जबलपुर। मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस की महामंत्री रेखा विनोद जैन ने रविवार को भगवान परशुराम को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसके बाद उनकी ही पार्टी के नेताओं ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया।
कांग्रेस के जबलपुर नगर अध्यक्ष ने उनके द्वारा किए गए पोस्ट पर कारण बताओ नोटिस जारी किया। हालांकि, पार्टी की फटकार के बाद रेखा जैन ने तुरंत यू-टर्न लेते हुए माफी मांग ली और सफाई दी कि फेसबुक पर पोस्ट देखते समय यह गलती से शेयर हो गया था। संज्ञान में आते ही उन्होंने पोस्ट डिलीट भी कर दिया।
इधर, कांग्रेस नगर अध्यक्ष ने पार्टी की नेत्री का बचाव करते हुए कहा है कि उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं की है, बल्कि एक लेखक का लेख था, जिसे उन्होंने शेयर किया था।
पोस्ट में लिखा था- परशुराम जातिगत घृणा के प्रतीक
रविवार को फेसबुक पर कांग्रेस की पूर्व नगर अध्यक्ष रेखा विनोद जैन ने एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें लिखा था,
कथाकार मणिका मोहिनी ने एक महत्वपूर्ण बात याद दिलाई है। औरंगजेब ने अपने भाई का सिर काटकर अपने पिता को भेंट किया था, जबकि परशुराम ने अपनी माता का सिर काटकर खुद को भेंट किया था।
मणिका जी के अनुसार, नीच स्वभाव के लोग दोनों ही जगह हैं। मेरी समझ से, विवेकहीन वहशी दरिंदे दोनों ही जगह हैं।
लेकिन हिंदुत्व की समस्या अधिक खतरनाक है, क्योंकि परशुराम को अवतार मानने वाले और उन्हें धर्म का प्रतीक मानने वाले, ब्राह्मणत्व और हिंदुत्व दोनों के भी मुखिया, अगुआ हैं।
अगर हमारा धर्म ष्सनातनष् है, तो उसने हमें माता-पिता का समान सम्मान सिखाया है। यह किसी विकृति का नतीजा है कि परशुराम जैसा चरित्र ष्आदर्शष् बन गया।
औरंगजेब क्रूर था, कोई उसे आदर्श नहीं मानता; मुसलमान भी अपनी संतान का नाम औरंगजेब नहीं रखते। लेकिन ष्हिंदुत्वष् के ठेकेदार परशुराम के मंदिर तक बनवाते हैं।
औरंगजेब सांप्रदायिकता के लिए कलंकित है, जबकि परशुराम जातिगत घृणा के प्रतीक हैं। उन्होंने बार-बार धरती से क्षत्रियों का विनाश करने का प्रयास किया। पता नहीं, फिर क्षत्रिय कैसे आ गए? इन मूर्खताओं पर विश्वास का दूसरा नाम हिंदुत्व है।