उज्जैन। विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने तारामंडल से शिप्रा विहार को जोड़ने के लिए फोरलेन का निर्माण किया है। इसमें स्टेट कनेक्टिविटी नहीं दी गई है यानी इंजीनियरिंग कॉलेज फोरलेन के बीच से सड़क को नहीं जोड़ा गया है।
ऐसे में करीब 8.50 करोड़ रुपए खर्च कर बनाई गई यह सड़क दो हिस्सों में बंटकर रह गई है। इसमें एक हिस्सा शिप्रा विहार से इंजीनियरिंग कॉलेज फोरलेन तक तो दूसरा हिस्सा तारामंडल से इंजीनियरिंग कॉलेज फोरलेन तक। सड़क के बीच में कनेक्टिविटी नहीं होने से इंजीनियरिंग कॉलेज फोरलेन एक्सीडेंटल जोन बन गया है। यूडीए ने मास्टर प्लान की एमआर-11 रोड की सड़क का ठेका गिरीराज कंस्ट्रक्शन को दिया है। इंजीनियरिंग कॉलेज फोरलेन पर ही करीब 48 लाख रुपए की लागत से साइकिल ट्रैक भी बनाया जा चुका है। मार्ग पर हेवी ट्रैफिक होने से इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
यूडीए ने शिप्रा विहार के वाणिज्यिक कैंपस को एमआर-2 भरतपुरी रोड से जोड़ने के लिए फोरलेन का निर्माण किया है, जो कि कुशाभाऊ मार्ग से होते हुए तारामंडल तक की करीब डेढ़ किमी तक की सड़क का हिस्सा है। इसका 50 प्रतिशत से ज्यादा कार्य हो चुका है। तारामंडल के समीप की सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इसमें अभी अर्थवर्क किया जा रहा है। सड़क के बीच में सेंटर लाइटिंग लगाई जाएगी। फुटपाथ का निर्माण भी होगा। सड़क के बीच में बनाए गए डिवाइडर में और आसपास में पौधे भी लगाए जाएंगे। इससे वाहन चालकों को वाहन चलाने में आसानी होगी।
दो सड़कों को जोड़ने के लिए रोटरी का प्रावधान करना ही भूले अफसर खास बात यह है कि सड़क की इंजीनियरिंग कॉलेज फोरलेन के बीच से यानी डिवाइडर तोड़कर कनेक्टिविटी इसलिए नहीं दी जा सकी है, क्योंकि बीच में रोटरी का प्रावधान ही नहीं किया गया। इस वजह से सड़क को बीच में से नहीं खोला जा सका है। देवास रोड व इंदौर रोड तथा शिप्रा विहार एवं तारामंडल की तरफ से आने वाले वाहनों के आपस में भिड़ने की आशंकाओं को देखते हुए ही सड़क को बीच में से यानी इंजीनियरिंग कॉलेज फोरलेन के बीच से रास्ता नहीं दिया गया है। यह पूरी तरह से प्लानिंग की खामी है। इसका खामियाजा अब वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।