नीमच। हम बात करेंगे जिले की प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया के नीमच दौरे की।जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया नीमच पहुंचीं, तो जिलेवासियों को बड़ी उम्मीदें थी। सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, कलेक्टर,एसपी और संबंधित सदस्यों के साथ उन्होंने एक 'कोर कमेटी' की बैठक की।
बैठक में क्या खास होगा,क्या बड़े फैसले लिए जाएंगे,क्या जिले के विकास को नई दिशा मिलेगी? इसी उत्सुकता के साथ पत्रकार करीब दो घंटे तक इंतजार करते रहे।लेकिन, जब बैठक खत्म हुई और मंत्री महोदया बाहर आईं, तो उम्मीदें टूट गईं। पत्रकारों ने जब सवालों की बौछार की, तो जवाब मिला...."कोई खास नहीं, कोर कमेटी की जनरल बैठक हमारी लेना होती है। हम लोग बैठते हैं 8-10 लोग। तो वही चर्चाएं। कोई दिशा निर्देश नहीं वैसे ही जनरल मीटिंग वैसे ही होती है।"नगरपालिका से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर भी जब सवाल पूछे गए, तो जवाब फिर वही – "देखेंगे, चर्चा करेंगे।" यानी, घंटों की बैठक के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं, कोई ठोस आश्वासन नहीं।अब सवाल उठता है कि प्रभारी मंत्री का दौरा इतना 'सामान्य' क्यों था? जब सरकार का पैसा और महत्वपूर्ण समय खर्च करके मंत्री अपने प्रभार वाले जिले में पहुंचती हैं, तो क्या बिना किसी खास चर्चा, बिना किसी बड़े निर्णय के लौट जाने का क्या औचित्य है? क्या यह दौरा सिर्फ एक औपचारिकता भर था, या फिर मीडिया को कुछ बताना ज़रूरी नहीं समझा गया?
जिले की जनता को अपने प्रभारी मंत्री से विकास की, कानून व्यवस्था की, समस्याओं के समाधान की उम्मीद होती है। उनके जवाबों से ऐसा लगता है, यह दौरा केवल 'खानापूर्ति' बनकर रह गया।