चित्तौड़गढ़। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ संस्थान चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में किला रोड स्थित जैन दिवाकर स्वाध्याय साधना संस्थान के नवीन परिसर में लोह पुरुष, स्पष्ट वक्ता, संथारा विशेषज्ञ गुरुदेव धर्म मुनि आदि ठाणा 4 का वर्षावास चातुर्मास का प्रथम प्रवचन बुधवार प्रातः 9 से 10 बजे तक हुआ।
श्रमण संघ मीडिया संयोजक सुधीर जैन ने विज्ञप्ति में बताया कि चातुर्मास के प्रथम दिन गुरुदेव धर्म मुनि ने कहा कि हमें परमात्मा ने पांचो इन्द्रियां दी है। इनका सदुपयोग करो। आप साधना करोगे तो ये आत्मा परमात्मा बन जायेगी। अपने आचरण में धर्म होना चाहिये । जितने भी दुख में हैं वे अपनी आत्मा के नहीं पर आत्मा के हैं। उन्होंने कहा कि घर आने वालों का आदर करना चाहिए। जैन धर्म शूर वीरों को धर्म है। मोक्ष में वही जाता है जो अपना संपूर्ण जीवन विवेक से जीता है।शरीर नाव के समान है। शरीर को साधना में लगाओगे तो भवसागर को पार कर लोगे।
धर्म मुनि ने चातुर्मास काल में अधिक से अधिक भावना रखते हुए धर्म से जुड़ने और गुरुवार से प्रारंभ हो रहे अखंड नवकार मंत्र जाप में सभी से भाग लेने का आव्हान किया। धर्मसभा में केशव विजय मुनि ने अपने प्रवचन में कहा कि साधना के लिए सदनिमित्त होना चाहिए। सदनिमित्त कितना भी ताकतवर हो यदि उपादान कमजोर होगा तो वो प्रभावी नहीं हो सकेगा। सदनिमित्त से सुप्रीति चाहिए। सुप्रीति दृढ़ होनी चाहिए। योगी का योग तब ही सफल होता है जब वो प्रेम प्रकट करे।
साध्वी रत्न श्री जी म सा ने सुमधुर वाणी में भजन ष्मीठे रस से भरियोड़ी जिनवाणी लागे, म्हाने आत्मा की बात घणी प्यारी लागेष्के माध्यम से भाव व्यक्त किए। श्रमण संघ के अध्यक्ष किरण डांगी ने गुरुवार से घर घर प्रारंभ हो रहे 24 घंटे के अखंड नवकार मंत्र जाप की जानकारी देते हुए सभी से अधिकाधिक सहयोग देते हुए सम्मिलित होने का अनुरोध किया। डांगी ने बताया कि नियमित प्रवचन जैन दिवाकर स्वाध्याय साधना संस्थान भवन, किला रोड, इनकम टैक्स विभाग के पास प्रातः 8रू45 से प्रातः 10.15 बजे तक होंगे।