चित्तौड़गढ़। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का 266 वॉं तेरापंथ स्थापना दिवस हर्षाेल्लास के साथ पन्नाधॉय कॉलोनी स्थित तेरापंथ भवन में मनाया गया।
कार्यक्रम नमस्कार महामंत्र से प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर उपासक कमल जैन नें कहा कि 265 वर्ष पहले आज ही के दिन आशाढी पूर्णिमा को जो गुरू पूर्णिमा के रूप में विख्यात है वार शनि गोधूलि वेला में धर्म क्रांति का बिगुल बजा , हे प्रभो ! यह तेरापंथ के उद्घोष के साथ आचार्य भिक्षु सहित तेरह संतो नें अलग अलग स्थानों पर भाव दीक्षा पचख कर धर्मसंघ की स्थापना की थी। उन्होंने आगे कहा कि तेरापंथ के सिद्धांतों को आज गहराई से हम सब समझें आचार्य भिक्षु विराट व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी बुद्धि कुशाग्र थी। गहन विषय को सरल दृष्टांत से समझाने की उनकी कला बेजोड़ थी। महावीर के प्रति अगाध आस्था थी। सत्य पथ पर चलते हुए अनेक प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना किया था। उनके जीवन के सैंकड़ों प्रसंग है जिनको पढ़ने से, सुनने से आत्म बल का विकास होता है, निर्मलता का विकास होता है। हमें हमारी श्रद्धा को मजबूत बनाना है हमें चिन्तन करना है कि मेरा भटकाव कब रूकेगा तेरापंथ मेरापंथ तभी बन सकेगा जब में सिद्धान्तों को समझ लूंगा हमारा चिन्तन आग्रह हीन होगा तेरापंथ मतलब जागो और जगाओ ।
तेरापंथ सभा के पूर्व अध्यक्ष सुनिल ढीलिवाल नें स्वरचित काव्य तेरापंथ है महान वीर भिक्षु महान है द्वारा सभी में उत्साह भर दिया ।
तेरापंथ सभा के पूर्व अध्यक्ष गौतम पोखरना पूर्व मंत्री रजनीश खाब्या तेरापंथ महिला मंडल की पूर्व अध्यक्षा प्रियंका ढीलिवाल नें विचार व्यक्त किये। तेरापंथ सभा के पूर्व अध्यक्ष अजीत ढीलिवाल पूर्व मंत्री सुरेन्द्र डूंगरवाल पूर्व कोषाध्यक्ष संजय श्रीमाल सदस्य देवेन्द्र डूंगरवाल छीतरमल सिंघवी राकेश बाबेल महेंद्र श्रीमाल महिला मंडल की पूर्व अध्यक्षा प्रितम पोखरना मंजू डूंगरवाल सदस्या प्रिति बाबेल रेखा ढीलिवाल किंजल डूंगरवाल युवक परिषद के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द बीकानेरीया पारस गोलेछा मुदित डूंगरवाल आदि नें गुरूओं की आराध्य की आराधना में मधुर स्वर लहरियों में गीतों का संगान किया। अंत में सभा के मंत्री ललित सुराणा ने सभी का आभार व्यक्त किया।