नीमच। कहा जाता है “कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो उछालकर देखो यारो।” यह कहावत सच साबित की है जिले के एक छोटे से गाँव बासनीया रामपुरा (मनासा) के 70 वर्षीय किसान भागीरथ नागदा ने।
लगभग 150-200 की आबादी वाले इस पहाड़ी गांव से निकलकर भागीरथ नागदा ने न केवल चीन तक की यात्रा की, बल्कि वहाँ जाकर आधुनिक कृषि की बारीकियाँ सीखीं और सिखाईं। गांव लौटकर उन्होंने जैविक खेती को अपनाया और स्वयं जैविक खाद तैयार कर फसलों की पैदावार शुरू की। इन फसलों से जैविक उत्पाद तैयार कर बाजार तक पहुँचाया और लोगों की सेहत का ख्याल रखने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती दी।
उनकी सकारात्मक सोच और सतत प्रयासों ने उन्हें आज जिले का ही नहीं बल्कि प्रदेश का प्रेरणादायी किसान बना दिया है। वे कई बार जिले और राजधानी में किसानों का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और निरंतर किसानों के हितों की बात रखते हैं। विभिन्न राज्यों के किसान उनसे संपर्क कर नई तकनीकों और खेती की जानकारी लेते हैं।
भागीरथ नागदा की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि उम्र कभी भी आगे बढ़ने और सपने पूरे करने में बाधा नहीं बनती। जैविक खेती के जरिए उन्होंने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि समूचे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गए हैं।
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