BREAKING NEWS
KHABAR : दीपावली पर 500 वर्ष प्राचीन श्री.. <<     KHABAR : दिवाली पर यात्रियों से खर्चा वसूलने वाले 3.. <<     BIG NEWS : धनतेरस की रात चंगेरा मंडी में चोरों का.. <<     BIG VIDEO UPDATE: विधायक का कमरा बना रंगरलियों का अड्डा?.. <<     खबर का हुआ असर! तराना के मुख्य बाजार से हटे चार.. <<     KHABAR : मलेरिया के खिलाफ मंदसौर स्वास्थ्य विभाग.. <<     KHABAR : देवास में धूमधाम से मनाया गया धनतेरस का.. <<     KHABAR : तराना के बाजार में लौटी रौनक, चार पहिया.. <<     BIG NEWS : 5 लाख 51 हजार के नोटों से सजा मालवा की.. <<     KHABAR : शिक्षकों की वरिष्ठता और पुरानी पेंशन पर.. <<     BIG VIDEO NEWS: हड़ताल खत्म, सफाईकर्मियों की.. <<     KHABAR : धनतेरस पर गेंदे के फूलों से महका सरवानिया.. <<     BIG NEWS : पहले चक्का जाम, फिर पानी के टैंकर का.. <<     शाजापुर में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना,.. <<     KHABAR : टीआई हत्याकांड में बड़ा खुलासा, शराब.. <<     KHABAR : हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ का कड़ा फैसला,.. <<     KHABAR : अनुदान प्राप्त शिक्षकों को 7वें वेतनमान.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
October 19, 2025, 1:47 pm
SHOK SAMACHAR : हैदर भाई डेरकी का 97 वर्ष की आयु में दुबई में हुआ निधन, नीमच की सामाजिक आत्मा अब हमारे बीच नहीं रही, सेवा और मानवता की एक युगांतकारी यात्रा का हुआ अंत, पढ़े खबर 

Share On:-

नीमच। आज सुबह जैसे ही शहर में दाऊदी बोहरा समाज के वरिष्ठ सदस्य और प्रसिद्ध समाजसेवी हैदर भाई डेरकी के निधन का समाचार फैला, पूरा नीमच शोक में डूब गया। 97 वर्ष की आयु में दुबई में उनका इंतकाल हो गया। उनके जाने से केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि नीमच ने अपनी सामाजिक आत्मा का एक स्तंभ खो दिया।

25 नवंबर 1928 को नीमच में जन्मे हैदर भाई ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा को समर्पित किया। उनका जीवन मानवता, सहयोग और करुणा का जीवंत उदाहरण था। वे 1966 में लायंस क्लब के गठन के समय से ही चार्टर मेंबर रहे और वर्षों तक अध्यक्ष और सचिव के रूप में सेवाएं देकर संगठन को मजबूत नींव दी। 1962 से 1968 तक सेफी बैंक के अध्यक्ष और डायरेक्टर के रूप में उन्होंने वित्तीय क्षेत्र में भी समाज को दिशा दी।

पहला रक्तदाता और नेत्रदान आंदोलन के अग्रदूत-
हैदर भाई डेरकी वह नाम हैं जिन्होंने नीमच में सबसे पहले रक्तदान कर निस्वार्थ सेवा की एक मिसाल कायम की। नेत्रदान शिविरों में 1969 से सक्रिय भूमिका निभाकर उन्होंने अनगिनत लोगों को नई रोशनी दी। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान बोहरा समाज ही नहीं, पूरे शहर के लिए प्रेरणादायक रहा। वे हर उस जरूरतमंद के लिए खड़े रहे, जिसे किसी मदद की आस थी। उन्होंने कभी समाजसेवा को दायित्व नहीं, बल्कि अपना धर्म माना।

हजारों दिलों में बसने वाला नाम-
उनके साथ सरदार सिंह राठौड़, भानु दवे, गुणवंत गोदावत, मोहन गर्ग, बल्लू पोरवाल, अरुण जायसवाल, डीएस चौरडिया, आनंद कालानी जैसे अनेक वरिष्ठ समाजसेवी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। यह वही पीढ़ी थी, जिसने नीमच को सामाजिक रूप से एक नई पहचान दी।

हैदर भाई हमारे मार्गदर्शक थे-
वरिष्ठ पत्रकार मुस्तफा हुसैन ने भावुक होकर कहा “हैदर भाई डेरकी हमारे मार्गदर्शक थे। उन्होंने हमें सिखाया कि सच्ची सेवा किस प्रकार की जा सकती है। नीमच के इतिहास में उनकी सेवाएं अमर रहेगी। उनके घनिष्ठ मित्र भानु दवे ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हैदर भाई का योगदान इतिहास में अमिट रहेगा। उनका जाना एक युग का अंत है।
हैदर भाई अपने पीछे पुत्र सरफराज अब्बास, पुत्री शमीम और भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। लेकिन उनका सबसे बड़ा परिवार वह सैकड़ों लोग हैं जिनके जीवन में उन्होंने उजाला भरा। उपरोक्त जानकारी पत्रकार अब्दुल अली ईरानी ने दी। 

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE