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October 19, 2025, 3:59 pm
SHOK SAMACHAR : याद आएंगे बहुत हैदर भाई डेरकी, एक आफताब रोशनी देने पहुँच गया अपनी जगह, दुआ अल्लाह से है वो अपनी बारगाह में दे दे रुतबा, आध्यात्मिक रचनाकार पं. मुस्तफा आरिफ ने दी श्रद्धांजलि, पढ़े खबर 

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याद आएंगे बहुत हैदर भाई डेरकी।
एक आफताब रोशनी देने पहुँच गया अपनी जगह।
नाम हैदर था तो रोशनी बाटना ही था काम उसका।
दुआ अल्लाह से है वो अपनी बारगाह में दे दे रुतबा। 
इन्ना लिल्लाहे व इन्ना लिल्लाहे राजेऊन देते हम सदा।


एक ज़माने में मालवा के फोटोग्राफर की दुनिया में और सेवा के क्षेत्र में अपना डंका बजाने वाले लायन हैदर अली डैरकी का 100 साल की उम्र में दुबई में इंतकाल हो गया। दुबई में वो अपने पुत्र सरफराज हुसैन डेरकी और पुत्री शमीम हुसैन के साथ रह रहे थे।
1950 से लगभग 2000 तक उनका सेवा के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान था। विशेषकर नीमच छावनी में और आसपास के क्षेत्रो में चाहे सीआरपीएफ के सैनिक से लेकर अधिकारी हो या नयागांव का नया सीमेंट प्लांट हो। हैदर भाई के विचार विमर्श को प्राथमिकता होती थी। 
मध्यभारत में नेत्रदान की परंपरा को प्रारंभ करने का श्रेय हैदर अली डेरकी को ही जाता है। लायंस क्लब नीमच के लम्बे समय तक अध्यक्ष रहे। निःस्वार्थ सेवा का स्तर स्वतः घर पहुंच तक था, दुखी दर्दी की आवाज और आभास उन्हें निश्चित रूप से वैष्णव जन की श्रेणी में रखता था। साम्प्रदायिक समन्वय के क्षेत्र में हैदर भाई गंगा जमुनी संस्कृति के प्रबल स्तंभ व ध्वज वाहक थे।
आज 100 साल की उम्र पर वो स्वर्ग सिधार गए, लेकिन उनकी स्मृति ताक़यामत शेष रहेगी। रिश्ते में हैदर भाई मेरे मामा और मार्गदर्शक थे। बहुत याद आएगी मुझे भी उनकी। मैं अंत में यहीं कहुंगा बड़ी मुश्किल से होता है, चमन में ऐसा दीदावर पैदा।

- पंडित मुस्तफ़ा आरिफ आध्यात्मिक 
रचनाकार मुंबई

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