कुकड़ेश्वर। भारतीय संस्कृति में दीपावली पर्व का विशेष महत्व है यह केवल दीपों का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और समृद्धि का प्रतीक है। पांच दिवसीय इस महापर्व के दूसरे दिन कुकड़ेश्वर के लोहार मोहल्ले में महिलाओं ने परंपरागत उत्साह के साथ गोवर्धन पूजा संपन्न की।
शहरों में लगभग विलुप्त हो चुकी गोवर्धन बावजी बनाने की परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए, स्थानीय महिलाओं ने गोबर से गोवर्धन बावजी का निर्माण किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं वैभव की कामना की।
कार्यक्रम में मंजू सोनी ने बताया कि प्राचीन काल में ब्रजवासी इंद्र देव की पूजा करते थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें गौ माता, नंदी और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया था, क्योंकि यही हमारे जीवन को धन-धान्य से परिपूर्ण करते हैं। इंद्र देव के क्रोधित होने पर जब मूसलधार वर्षा हुई, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों और गौधन की रक्षा की थी। तभी से यह गोवर्धन पूजा की परंपरा हर वर्ष निभाई जाती है।
पूजन कार्यक्रम में सरोज लोहार, रामकन्या बाई, दुर्गा लोहार, टीना लोहार सहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने मिलकर भारतीय संस्कृति के इस अद्भुत पर्व को हर्षाेल्लास के साथ मनाया और समूचे क्षेत्र के कल्याण की कामना की।
इसके साथ ही आसपास की गौशालाओं में भी गौ माता और गोवर्धन बावजी की पूजा-अर्चना की गई, जिससे वातावरण भक्तिमय और उत्सवमय हो उठा।
ब्राह्मण मोहल्ला में भी महिलाओं ने पारंपरिक रूप से गोवर्धन पूजा की और गौ सेवा कर सुख-समृद्धि तथा शांति की प्रार्थना की।