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October 23, 2025, 3:28 pm
KHABAR : शाजापुर के अमर वीर स्व. श्री चांदमल जी रामरू सनातन संस्कृति के रक्षक और समाज चेतना के दीपस्तंभ, समाजसेवा, धर्मरक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद, पढ़े दिलीप सौराष्ट्रीय की खबर

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शाजापुर। शाजापुर के गौरवशाली इतिहास में जब भी सामाजिक एकता, धार्मिक चेतना और राष्ट्रभक्ति की बात होगी, तब स्वर्गीय श्री चांदमल जी राम का नाम दीपस्तंभ की तरह आलोकित रहेगा। वे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि विचार, संस्कार और प्रेरणा के स्रोत थे, जिन्होंने शाजापुर में समाजसेवा, धर्मरक्षा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का शंखनाद किया।

सनातन धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता-
श्री चांदमल जी राम ने उस समय, जब समाज में सांस्कृतिक चेतना मंद पड़ रही थी, शाजापुर में उत्सवों की जीवंत परंपरा को पुनर्स्थापित किया। उन्होंने श्री कृष्ण व्यायामशाला की स्थापना कर युवाओं में शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित की। दशहरा, कंस वध और होली उत्सवों को उन्होंने केवल त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और धार्मिक जागरण के पर्व के रूप में प्रस्तुत किया। उनके प्रयासों से शाजापुर में “जय जय श्रीराम” के उद्घोष गूंजने लगे और युवाओं में सेवा तथा संगठन की भावना प्रबल हुई।

मानवता के लिए सर्वाेच्च बलिदान-
11 नवम्बर 1986 भाई दूज का वह अमर दिवस, जब श्री चांदमल जी राम ने दो मासूम मुस्लिम बालिकाओं के जीवन की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी। धधकती आग में कूदकर उन्होंने दिखाया कि सच्चा सनातनी वही है जो मानवता के सम्मान, सुरक्षा और न्याय के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दे। यह घटना “वसुधैव कुटुम्बकम्” के सिद्धांत का जीवंत उदाहरण बनी।

संयम, पराक्रम और करुणा का प्रतीक-
श्री चांदमल जी राम का व्यक्तित्व संतों के संयम, योद्धाओं के पराक्रम और समाजसेवकों की करुणा का समन्वय था। उनकी वाणी में ओज था, कर्म में तेज था और मन में मातृभूमि के प्रति भक्ति। उन्होंने जीवन सिखाया कि धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने की साधना है।

पुण्यतिथि पर पावन स्मरण-
भाई दूज के पावन अवसर पर श्रीकृष्ण व्यायामशाला में समाजजन और ट्रस्टीगण ने सुबह 10 बजे श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में कहा गया कि स्व. श्री चांदमल जी राम की स्मृतियाँ समाज के हृदय में सदैव अमिट रहेंगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी कि “धर्म वही जो सबके हित में हो, सेवा वही जो निःस्वार्थ हो, और बलिदान वही जो सत्य की रक्षा के लिए हो।”

जब तक सूरज चाँद रहेगा राम जी का नाम रहेगा।
और जब तक भारत की भूमि पर धर्म, साहस और सेवा की बात होगी शाजापुर के इस अमर पुरुष का नाम हमेशा जीवित रहेगा।

 

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