प्रतापगढ़। पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संजीवनी सेवा संस्था द्वारा निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिला कलेक्टर महोदया के दिशा-निर्देश में संस्था द्वारा मोरिंगा (सहजन) की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिदिन नए-नए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
संस्थान के कार्यकर्ताओं द्वारा जिले के विभिन्न इलाकों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को सहजन की खेती के फायदे बताए जा रहे हैं। साथ ही मनरेगा कार्यस्थलों और ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इस फसल की जानकारी देकर प्रशासन के सहयोग से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
अफीम की तुलना में अधिक मुनाफे वाली फसल-
विशेषज्ञों के अनुसार, सहजन की खेती अफीम जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल है। इसके पौधों से औषधीय गुणों वाले उत्पाद प्राप्त होते हैं, जो कुपोषण दूर करने में भी सहायक हैं।
संस्थान का उद्देश्य जिले में सहजन की खेती को प्रोत्साहन देकर किसानों की आय बढ़ाना, पर्यावरण को संतुलित रखना और आमजन के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। संजीवनी सेवा संस्था ने जिले के अनेक गांवों में जाकर सहजन के पौधों के वितरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं।