शाजापुर। शहीद दिवस के अवसर पर सोमवार, 27 अक्टूबर 2025 को अमर शहीद शिवदयाल सिंह चौहान की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह कार्यक्रम बालकृष्ण शर्मा नवीन महाविद्यालय, ए.बी. रोड, शाजापुर परिसर में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम में विधायक अरुण भीमवाद, भाजपा प्रदेश मंत्री क्षितिज भट्ट, जनभागीदारी अध्यक्ष विपुल कसेरा, पैरा कमांडो नरेंद्र विश्वकर्मा, शहीद की धर्मपत्नी अन्नपूर्णा चौहान, कांग्रेस जिलाध्यक्ष नरेश्वर प्रताप सिंह, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा प्रदेश अध्यक्ष रामवीर सिंह, करणी सेना जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सिसोदिया, सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, समाजजन, विद्यार्थी और परिवारजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुनील आडवाणी ने किया। विधायक अरुण भीमवाद ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित करते हैं। भाजपा प्रदेश मंत्री क्षितिज भट्ट ने शहीद चौहान के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका बलिदान राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। वहीं करणी सेना जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि देशहित में कार्य करने वाले प्रत्येक युवा को सम्मानित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन शहीद शिवदयाल सिंह चौहान के सुपुत्र विजेंद्र सिंह चौहान (रामगढ़) ने किया।
अमर शहीद शिवदयाल सिंह चौहान : एक वीर गाथा
अमर शहीद शिवदयाल सिंह चौहान का जन्म 5 अक्टूबर 1954 को ठा.सा. रंजीत सिंह चौहान (उर्फ़ प्रताप सिंह) के घर, ग्राम कडूला, जिला शाजापुर में हुआ था। उनका पैतृक गांव रामगढ़, जिला राजगढ़ है। प्रारंभिक शिक्षा नेहरू उच्च माध्यमिक विद्यालय, आगर-मालवा में तथा उच्च शिक्षा बालकृष्ण शर्मा नवीन महाविद्यालय, शाजापुर में प्राप्त की। उन्होंने NCC के तीनों सर्टिफिकेट (A, B, C) अर्जित किए।
देशसेवा की भावना से ओतप्रोत शिवदयाल सिंह ने वर्ष 1975 में BSF (सीमा सुरक्षा बल) में भर्ती होकर देश की सीमाओं पर सेवा दी। उन्होंने मध्यप्रदेश, असम, राजस्थान, पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न सीमावर्ती इलाकों में कार्य किया। विवाह ठिकाना खड़ी डोडिया में हुआ, और वे भूतपूर्व विधायक ठा.सा. लक्ष्मण सिंह डोडिया (विधानसभा गुलाना) के ज्येष्ठ दामाद थे।
उन्होंने 1988 से 1990 तक भारतीय दूतावास, काठमांडू (नेपाल) में तथा 1990 से 1992 तक भारतीय दूतावास, जकार्ता (इंडोनेशिया) में सिक्योरिटी हेड के रूप में सेवा दी। बाद में उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के बारामुला सेक्टर में हुई।
15 जुलाई 1994 को आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने अपनी टीम के साथ बहादुरी से सामना किया। सभी आतंकियों को ढेर कर दिया गया, किंतु उसी दौरान उनकी जीप एक IED (बारूदी सुरंग) पर चढ़ गई और हुए विस्फोट में वे वीरगति को प्राप्त हुए। रिटायरमेंट में मात्र ढाई महीने शेष थे, लेकिन उन्होंने देशसेवा को प्राथमिकता दी और मातृभूमि पर अपने प्राण न्योछावर कर दिए। आज भी अमर शहीद शिवदयाल सिंह चौहान का बलिदान न केवल राजपूत समाज, बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिए गर्व का प्रतीक है।