नीमच। जावद रोड पर शुक्रवार 7 नवंबर की शाम हुआ हादसा केवल सड़क पर टकराए दो पहियों का नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की ज़िंदगी को चीर देने वाला क्षण बन गया। नशे में धुत एएसआई मनोज यादव की लापरवाही ने दशरथ बावरी की साँसें वहीं थाम दीं और पीछे छोड़ दिया एक ऐसा घर, जहाँ अब हर कमरे में सन्नाटा और आँखों में आंसुओं का समंदर है। पत्नी, बेटी और छोटा बेटा अस्पताल के बिस्तरों पर जीवन से जूझ रहे हैं बेटे हर्षित का पैर भी कट चुका है। इलाज के लिए अब परिवार समाज की मदद का इंतज़ार कर रहा है।
नशे में धुत्त एएसआई ने छीन ली परिवार की खुशियां-
वॉइस ऑफ एमपी की टीम मंगलवार को स्व. दशरथ बावरी के निवास पर पहुँची और परिजनों से दुःखद घटना के संबंध में विस्तृत बातचीत की। परिवार के सदस्यों ने बताया कि दशरथ बावरी और उनके भाई भगत बावरी दोनों शिक्षक थे और प्रतिदिन एक ही वाहन से विद्यालय जाते थे। भगत बावरी ने कहा- हम दोनों हमेशा हेलमेट पहनकर नियमों का पालन करते थे। लेकिन शराब के नशे में एएसआई मनोज यादव ने हमारे भाई की ज़िंदगी छीन ली। यह सब किसी दुःस्वप्न जैसा लगता है।
आर्थिक तंगी ने किया विवश, नहीं बचा पाए पैर-
दुर्घटना में घायल दशरथ बावरी का छोटा पुत्र हर्षित भी गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसका पैर बचाने के लिए चिकित्सकों ने तत्काल उच्च स्तरीय उपचार की सलाह दी थी। परिवार को बताया गया था कि समय पर 5 लाख रुपये उपलब्ध हो जाएँ तो बच्चे का पैर बचाया जा सकता है, परंतु आर्थिक तंगी ने उन्हें विवश कर दिया। तीन बार बच्चे को ऑपरेशन थिएटर से बाहर लाना पड़ा और अंततः उसका पैर नहीं बच पाया।
इलाज के लिए लाखों रूपये की आवयकता-
परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। हर्षित की माँ और बहन भी अस्पताल में भर्ती हैं। परिजनों के अनुसार अब तक लगभग 3 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि आगे इलाज में कम से कम 7 से 8 लाख रुपये और लगने की संभावना है। परिवार के बड़े सदस्य कन्हैया लाल बावरी ने बताया कि हमें प्रशासन की ओर से केवल 50 हजार रुपये रेडक्रॉस की ओर से मिले हैं। इसके अलावा समाजसेवी संस्थाओं और आम लोगों द्वारा की गई छोटी-बड़ी मदद से ही इलाज चल रहा है।
अधिकारी की तनख्वाह से करें पालन पोषण की व्यवस्था-
परिवार के सदस्य गोपाल बावरी ने घटना के लिए दोषी अधिकारी पर कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा नशे में धुत होकर एएसआई ने चार मोटरसाइकिलें ठोकीं। एक हादसे ने हमारे तीन छोटे बच्चों का भविष्य छीन लिया है। उस अधिकारी की तनख्वाह से बच्चों की पढ़ाई व पालन-पोषण की स्थायी व्यवस्था की जाए।
दानदाताओं से की सहायता की अपील-
परिजनों ने समाजसेवी संगठनों, दानदाताओं और भामाशाहों से सहायता की अपील की है, क्योंकि बच्चों व घायल परिजनों का इलाज जारी है और आर्थिक संसाधन समाप्त हो चुके हैं। परिवार ने स्कैनर व बैंक खाते के माध्यम से सीधे सहयोग का विकल्प भी उपलब्ध कराया है। इसी बीच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने घायल बालक हर्षित के उपचार के लिए रेडक्रास नीमच से 1.50 लाख रूपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। डिप्टी कलेक्टर पराग जैन ने बताया कि सहायता राशि का चेक बालक हर्षित की माता ललीता राठौर को एसडीएम जावद के माध्यम से प्रदान किया गया है।