छतरपुर। जिला के खजुराहो में सांसद खेल महोत्सव कि बैठक आयोजित की गई जिसमें खजुराहो सांसद विष्णुदत्त शर्मा,पर्यावरण राज्य वन मंत्री दिलीप अहिरवार, स्थानीय विधायक अरविन्द पटेरिया मौजूद रही जिसमें खजुराहो संसदीय क्षेत्र में आयोजित होने वाली खेल प्रतियोगिता को लेकर चर्चा कि गई, खेल प्रतियोगिता की शुरुआत कटनी से की गई, जिसका सेमीफइनल खजुराहो में खेला जाएगा वहीँ फाइनल मैच पन्ना में आयोजित किये जाएंगे।
बैठक के दौरान खजुराहो सांसद ने आगामी दिसंबर माह में आयोजित होने वाली मध्यप्रदेश की कैबिनेट बैठक के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि 8 और 9 दिसंबर को मध्यप्रदेश की कैबिनेट बैठक खजुराहो में आयोजित की जाएगी जिसमें विकास योजनाओं, निवेश, पर्यटन और प्रशासनिक सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर केंद्रित चर्चा होगी वहीँ बुंदेलखंड के विकास के लिए केन बेतवा लिंक परियोजना की समीक्षा भी इस बैठक में की जाएगी वहीँ बैठक से पहले खजुराहो को क्लीन खजुराहो और ग्रीन खजुराहो की और विशेष ध्यान दिया जायेगा।
खजुराहो में आयोजित खेल सांसद बैठक के दौरान एसआईआर पर चर्चा करते हुए खजुराहो सांसद ने एसआईआर देश की सबसे बढ़ी जरुरत बताया है इस दौरान खजुराहो सांसद ने देश को अस्थिर करने वाले लोग कौन है? जो फर्जी आधारकार्ड बनाते हैं फर्जी मतदाता बन जाते हैं और भारत में आतंक की पृष्ठ भूमि रचते हैं ऐसे में एसआईआर एक गहन पुनरीक्षण है
खजुराहो सांसद ने लोगों से अपील भी की, अपने आसपास अगर ऐसा कोई जो फर्जी तरीके से मतदाता बन गया हो तो यह अवसर है ऐसे लोगों को डिटेक्ट करने का और नए लोग जोड़ने का और अब एक मतदाता सूची होगी।
इस दौरान खजुराहो सांसद ने दिग्विजय सिंह पर जमकर निशाना साधते हुए लगा कि हिडमा दुनिया का सबसे बड़ा नक्सलवादी आतंकवादी था हिडमा और उसकी पत्नी पर करोड़ों रुपये के इनाम थे लेकिन जब उनके एनकाउंटर किये जाते हैं तो दिग्विजय सिंह के पेट में दर्द क्यों होता है क्योंकि दिग्विजय सिंह देश विरोधी ताकतों के साथ खड़े होने वाले लोग हैं मोहन चंद्र शर्मा की शहादत होती है तब दिग्विजय सिंह उसे फर्जी एनकाउंटर बताते हैं यही नहीं दिग्विजय सिंह आतंकवादी से गले मिलने भी जाते हैं, बाद में सुप्रीम कोर्ट से फांसी की सजा मिलती है...मध्यप्रदेश में नक्सलियों से लड़ते हुए दो से तीन बार आशीष शर्मा को प्रमोशन दिया जाता है और वह शहीद हो जाता है, उसे भी दिग्विजय सिंह फर्जी एनकाउंटर बताते हैं... यह देश को समझना चाहिए, मध्यप्रदेश ने तो पहले ही नकार दिया है लेकिन ऐसे लोगों के बारे में गंभीर चिंतन की जरूरत है।