चित्तौड़गढ़। ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर आशा दीदी ने वाणी का महत्व बताते हुए कहा कि वास्तव में, शब्दों का बहुत प्रभाव होता है, ये न केवल हमारे खुद के जीवन को प्रभावित करते हैं, बल्कि दूसरों पर भी गहरा असर डालते हैं। जैसे कि आप ने उल्लेख किया कि हम जो बोलते हैं, वह एक प्रकार की ऊर्जा होती है, जो हमसे निकलकर ब्रह्मांड में फैल जाती है और लौटकर हमारे पास आती है। यह विचार बहुत गहरा है, और यह सनातन धर्म और कई अन्य आध्यात्मिक परंपराओं में भी सत्य माना जाता है।
आशा दीदी ने कहा कि अच्छे शब्द बोलने से सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, और जब हम दूसरों के बारे में अच्छा बोलते हैं, तो वह न केवल उनके जीवन को छूता है, बल्कि हमारे अपने मन पर भी अच्छे प्रभाव डालता है। शब्दों के द्वारा किसी का दिल दुखाना, उसे हतोत्साहित करना या अपमानित करना, हमें मानसिक और आत्मिक दृष्टि से भी नुकसान पहुंचा सकता है। इससे न केवल हमारी मानसिक स्थिति प्रभावित होती है, बल्कि यह हमारे रिश्तों में भी दरार डाल सकता है।
अनिता दीदी ने कहा कि राजयोगिनी आशा दीदी की बातों में यह शिक्षा है कि हमें अपने बोलने के तरीके पर ध्यान देना चाहिए। खासकर यह कि क्या हमारे शब्द किसी के दिल को चोट पहुँचाने के बजाय उसे प्रेरित या आराम देने वाले हैं। जैसे आपने कहा, अच्छे और मधुर शब्दों से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो अंततः हमारे जीवन में समृद्धि और शांति लाती है।
आपके विचारों से यह भी स्पष्ट होता है कि हमारे शब्दों में सृजन और विनाश की शक्ति होती है, और यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम किस दिशा में उन्हें उपयोग करें। क्या आपको लगता है कि सकारात्मक शब्दों का असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर भी होता है?