नीमच। प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय के न्यायालय में लंबित भरण-पोषण प्रकरण राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से सफलतापूर्वक निपटाया गया। यह मामला सीता बनाम अजय (परिवर्तित नाम) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत भरण-पोषण वसूली से संबंधित था, जो वर्ष 2024 से न्यायालय में लंबित था।
साथ ही, पति-पत्नी के बीच भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के अंतर्गत दहेज उत्पीड़न का एक अन्य आपराधिक प्रकरण भी लंबित था, जिससे दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव और वैवाहिक विवाद बना हुआ था।
राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर प्रकरण को सुलह-समझौते हेतु प्रस्तुत किया गया। खंडपीठ के पीठासीन अधिकारी प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय डॉ. कुलदीप जैन, खंडपीठ सदस्य बालकृष्ण सौलंकी तथा अधिवक्ता यशवंत चतुर्वेदी और रूचि वर्मा के प्रयासों से दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित हुआ।
आपसी समझौते के आधार पर पति-पत्नी ने अपने विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान किया। परिणामस्वरूप, भरण-पोषण वसूली से संबंधित प्रकरण और अन्य लंबित विवाद राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से अंतिम रूप से निपटाए गए।
इस समाधान से दोनों पक्षों को शीघ्र न्यायपूर्ण राहत मिली और न्यायालय का समय भी बचा। दोनों प्रकरणों में खंडपीठ और संबंधित पक्षों के प्रयासों के फलस्वरूप लंबित न्यायिक विवाद का संतोषजनक और न्यायसंगत निपटारा हुआ।