नीमच। नगर पालिका परिषद नीमच द्वारा सीताराम जाजू सागर डैम के सीमांकन का कार्य दूसरे दिन भी जारी रहा। सीमांकन कार्य राजस्व विभाग एवं नगर पालिका के संयुक्त दल की उपस्थिति में विधिवत रिकॉर्ड के आधार पर किया गया। इस दौरान जीरन तहसील के राजस्व अमले में आरआई योगेश चोपड़ा, पटवारी सुरेश यादव, युवराज सिंह एवं चौरड़िया सहित नगर पालिका के केमिस्ट सुरेश पंवार, राजस्व उप निरीक्षक दिनेश टांक, महावीर जैन, डैम प्रभारी शेरू चौहान तथा अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
सीमांकन कार्य के दौरान कालियाखेड़ी, पिपलिया गुर्जर, भीमाखेड़ी, पावती सहित आसपास के गांवों के किसान भी उपस्थित रहे। नगर पालिका के केमिस्ट सुरेश पंवार ने बताया कि सीमांकन पूरी पारदर्शिता एवं राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार किया जा रहा है तथा किसी भी गांव के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सीमांकित भूमि को ट्रैक्टर के फ्लो (हल) से चिन्हित कर आरक्षित किया जा रहा है ताकि डैम क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। नगर पालिका का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों के लिए पेयजल स्रोतों का संरक्षण करना है।
पंवार ने कहा कि नीमच शहर की अनुमानित आबादी लगभग 1.70 लाख है, जिसमें शासकीय आवास, सीआरपीएफ परिसर एवं विस्तारित शहरी क्षेत्र भी शामिल हैं। ऐसे में शहर की बढ़ती जल आवश्यकता को देखते हुए सीताराम जाजू सागर डैम नगर पालिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण पेयजल स्रोत है।
उन्होंने बताया कि लगातार बढ़ते तापमान, भूजल स्तर में गिरावट तथा अनिश्चित मानसून को देखते हुए भविष्य के लिए जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। नगर पालिका द्वारा सीमांकन का उद्देश्य डैम क्षेत्र में अतिक्रमण एवं पानी की चोरी रोकना है, ताकि नागरिकों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।
पंवार ने बताया कि वर्तमान में नगर पालिका के पास पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता है। डैम के अलावा हैंडपंप, कुएं एवं ट्यूबवेल जैसे अन्य जल स्रोत भी उपलब्ध हैं तथा लगभग 5.5 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी का भंडारण मौजूद है।
उन्होंने जल संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि विश्व में कुल जल संसाधनों में पीने योग्य पानी की मात्रा मात्र 3 प्रतिशत है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि जल का संरक्षण एवं सदुपयोग करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह अमूल्य संसाधन सुरक्षित रह सके।