चित्तौड़गढ़। श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय, कल्याण लोक जावदा (निम्बाहेड़ा) में 23 जनवरी को बसंत पंचमी एवं महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती का संयुक्त आयोजन गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति की त्रिवेणी प्रवाहित होती दिखाई दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री शेषावतार श्री कल्लाजी महाराज, माँ सरस्वती, भारत माता एवं नेताजी सुभाषचंद्र बोस के चित्रों पर विधिवत पूजन-अर्चन के साथ किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना द्वारा कार्यक्रम को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया गया।
विश्वविद्यालय के छात्र रजत ने बसंत पंचमी के महत्व पर सारगर्भित उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए इसे ज्ञान, नवसृजन एवं सकारात्मक ऊर्जा का पर्व बताया। वहीं छात्र प्रत्युष द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
विश्वविद्यालय के आचार्य डॉ. राहुल कुमार सती ने बसंत ऋतु एवं बसंत पंचमी के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं वैदिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए पर्व की शुभकामनाएं दीं। आचार्य विनायक वानखेड़े ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका जीवन युवाओं के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के चेयरपर्सन कैलाशचंद्र मूंदड़ा ने अपने ओजस्वी एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में ज्ञान, चेतना और नवजीवन का प्रतीक है। इसी दिन माँ सरस्वती की आराधना कर हम विद्या, विवेक और संस्कारों का आह्वान करते हैं।
उन्होंने कहा कि बसंत ऋतु प्रकृति के साथ-साथ मानव जीवन में भी नवीन ऊर्जा, उल्लास और सृजनशीलता का संचार करती है। विद्यार्थियों के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उन्हें ज्ञानार्जन एवं आत्मविकास के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।
नेताजी सुभाषचंद्र बोस को स्मरण करते हुए श्री मूंदड़ा ने कहा कि उनका जीवन राष्ट्रभक्ति, साहस और बलिदान की जीवंत मिसाल है। “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” जैसे नारे से उन्होंने देशवासियों में स्वतंत्रता की अलख जगाई। आज के युवाओं को उनके विचारों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य केवल डिग्रियाँ देना नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त, राष्ट्रनिष्ठ और चरित्रवान नागरिकों का निर्माण करना है। विश्वविद्यालय इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मिता शर्मा ने किया। डॉ. रोहित शर्मा ने आभार व्यक्त किया तथा डॉ. सौरभ जोशी द्वारा शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर सामूहिक वंदे मातरम् गायन किया गया। राष्ट्रगीत के गान के साथ सभागार देशभक्ति के उद्घोष से गूंज उठा और समापन अत्यंत भावविभोर वातावरण में हुआ।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के आचार्यगण, शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।