नीमच। मध्यान्ह भोजन कार्यकर्ता कंचनबाई मेघवाल की मृत्यु के मामले में प्रशासन के रवैये पर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) ने कड़ा ऐतराज जताया है। सीटू नेताओं ने इस घटना को मानवीय संवेदना से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए कहा कि प्रशासन को असंगत वक्तव्य देने के बजाय पीड़ित परिवार की तत्काल मदद करनी चाहिए।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष पुषण भट्टाचार्य, महासचिव प्रमोद प्रधान, सचिव शैलेंद्र सिंह ठाकुर एवं मध्यान्ह भोजन समूह के संयोजक मनोहर बैरागी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि प्रत्यक्षदर्शी बच्चों और उनके पालकों ने स्पष्ट रूप से बताया है कि कंचनबाई मेघवाल ने बच्चों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवाई। ऐसे में यह घटना किसी सामान्य मृत्यु का मामला नहीं बल्कि कर्तव्य पालन में बलिदान की श्रेणी में आती है।
नेताओं ने कहा कि कंचनबाई मेघवाल ने अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चों की सुरक्षा को सर्वाेपरि रखा। उनके पति लकवाग्रस्त हैं और परिवार पहले से ही गंभीर आर्थिक व सामाजिक संकट में है। ऐसे में प्रशासन को संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाना चाहिए, न कि तथ्यों पर किंतु-परंतु करना चाहिए।
सीटू नेताओं ने स्पष्ट मांग की कि कंचनबाई के परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए तथा उनके पुत्र को शासकीय नौकरी प्रदान की जाए, ताकि परिवार को भविष्य में सम्मानजनक जीवन मिल सके।
आंदोलन की चेतावनी
मध्यान्ह भोजन समूह की प्रदेश अध्यक्ष माया बैरागी, जिला अध्यक्ष माया पाटीदार, आशा यूनियन की जिला अध्यक्ष कृष्णा कांटे एवं आंगनबाड़ी यूनियन के संयोजक सुनील शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय प्रशासन ने शीघ्र उचित निर्णय नहीं लिया, तो मध्यान्ह भोजन समूह, स्वयं सहायता समूह और सीटू पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं बल्कि हजारों महिला कर्मियों के सम्मान और सुरक्षा का सवाल है।