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February 9, 2026, 4:34 pm
KHABAR : इंदौर जिला कोर्ट का बड़ा फैसला, आरक्षक की पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी मुआवजा देने का आदेश, सड़क हादसे में हुई थी पुलिसकर्मी की मौत, पढे़ खबर 

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इंदौर। जिला कोर्ट ने सीहोर जिले के जवरा थाना क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना में मौत को लेकर एक अहम और संवेदनशील फैसला सुनाया है। इस फैसले में गर्भ में पल रहे अजन्मे शिशु को भी मृतक के परिजनों की श्रेणी में शामिल करते हुए मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।


अधिवक्ता राजेश खंडेलवाल के मुताबिक यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि भविष्य के ऐसे मामलों के लिए भी एक मिसाल माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार आरक्षक सतीश, पिता कैलाश रुडेलें, जो झाबुआ में पदस्थ थे, एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह हादसा जवरा थाना सीहोर क्षेत्र में उस समय हुआ, जब उनकी कार को तेज रफ्तार और लापरवाही से आ रही एक ट्रक ने टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि इसमें आरक्षक सतीश सहित एक अन्य  की मौके पर ही मौत हो गई। 


मृतक की पत्नी रेखा उस समय सात महीने की गर्भवती थीं। हादसे के बाद परिवार की ओर से हर्जाने को लेकर न्यायालय में याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस तथ्य को गंभीरता से लिया कि मृतक की पत्नी गर्भवती थी और गर्भ में पल रहा शिशु भी मृतक पर आश्रित माना जाना चाहिए। कोर्ट ने मृतक के परिवार को कुल 50 लाख 88 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके साथ ही 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के आधार पर यह राशि बढ़कर लगभग 60 लाख रुपये तक पहुंच गई। 


इस मुआवजे में मृतक की पत्नी, दो बच्चे, मां, अजन्मा शिशु और उनके साथ रहने वाले छोटे भाई को आश्रित मानते हुए शामिल किया गया है। न्यायालय के इस फैसले को कानूनी विशेषज्ञों ने ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय समाज में गर्भस्थ शिशु के अधिकारों को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं पीड़ित परिवार ने न्यायालय के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह मुआवजा उनके भविष्य को कुछ हद तक सुरक्षित करने में सहायक होगा। यह फैसला सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।

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