इंदौर। बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और जलवायु परिवर्तन के दौर में जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। इसी उद्देश्य के साथ मेडिकैप्स विश्वविद्यालय में जल प्रबंधन और पर्यावरणीय सततता विषय पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जल संरक्षण, तकनीकी नवाचार और शोध आधारित समाधानों को भविष्य की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदित्य बिड़ला समूह, धार सीमेंट वर्क्स के ज्वाइंट प्रेसिडेंट एवं यूनिट हेड नितेश कुमार निराला ने कहा कि उद्योगों में जल संरक्षण केवल संसाधनों की बचत का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच और नवाचार के माध्यम से टिकाऊ विकास की दिशा में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की ऑल इंडिया एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग डिवीजन के चेयरपर्सन ई. जगदीश चंद सिंघल ने की। उन्होंने कहा कि जल संकट से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, शोध और प्रभावी प्रबंधन को साथ लेकर चलना होगा। मेडिकैप्स विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) डी.के. पटनायक ने कहा कि विश्वविद्यालय वैज्ञानिक अनुसंधान और सतत विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
तकनीकी सत्र में क्लीन-वॉटर (सस्टेनेबल वाटर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड) के सीईओ प्रियांशु कुमठ ने जल निकायों के पुनर्जीवन, बायोरिमेडिएशन और आधुनिक जल प्रबंधन तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए तथा शोध कार्यवाही (प्रोसीडिंग्स) का विमोचन भी किया गया।
आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों, वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों के बीच संवाद स्थापित करना तथा जल प्रबंधन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षक, शोधार्थी और विशेषज्ञ शामिल हुए।