नीमच। मालव माटी के सपूत, पूर्व सांसद एवं प्रख्यात साहित्यकार बालकवि बैरागी राष्ट्र कवि होने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों के संरक्षक थे उनकी कविताओं में जोश के साथ-साथ उत्साह का भाव भी था। सूरज को उन्होंने ललकारा उक्त उद्गार अंग्रेजी के विद्वान, प्राचार्य डॉ आर .एस .शर्मा ने ज्ञानोदय संस्थान में आयोजित बालकवि बैरागी के जन्मोत्सव पर व्यक्त किये।
साहित्य का डॉ. महिपाल सिंह चौहान ने बैरागीजी के संस्मरण सुनाते हुए उनकी कविताओं का पाठ किया और कहा कि बैरागी जी सदैव मालवा एवं मालवी कविताओं को महत्व देते थे पनिहारिन कविता उनकी प्रसिद्ध कविता है।
बालकवि बैरागी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र शक्तावत में बालकवि बैरागी जी से जुड़े हुए संस्मरण सुनाते हुए बताया कि हताशा निराशा और कुंठा को बैरागी जी ने कभी छूने नहीं दिया ।गरीब परिवार से निकलकर विधायक विधायक ,मंत्री ,लोकसभा सांसद, राज्यसभा सदस्य जैसे बड़े पदों पर पहुंचे उसके बाद भी आम जन से उनका गहरा लगाव रहा है।
ज्ञानोदय विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार हेमंत प्रजापति ने कहा कि बालकवि बैरागी जी कवि होने के साथ-साथ गीतकार भी थे ,उनका लिखा हुआ गीत तू चंदा मै चांदनी, लता मंगेशकर ने गाया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ .विनीता डावर ने कहां की बैरागी जी ने बच्चों के लिए भी कविताएं लिखी है वह बच्चों के लिए प्रेरक एवं मार्गदर्शन थे। इस कार्यक्रम में सभी विभाग अध्यक्ष प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। उक्त जानकारी प्रो.अनूप चौधरी ने दी।