नीमच। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्टर कार्यालय नीमच में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई उस समय सुर्खियों में आ गई, जब ग्राम भोलियावास निवासी मोहनलाल बागरी गले में दर्जनों आवेदन पत्रों की माला पहनकर और हाथ में “मुझे आत्मदाह की अनुमति प्रदान करें” लिखी तख्ती लेकर प्रशासन के सामने पहुंचे। किसान का यह आक्रोशित और व्यथित रूप देखकर कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई और उपस्थित अधिकारी तथा कर्मचारी स्तब्ध रह गए।

मोहनलाल बागरी ने आरोप लगाया कि उनके गांव के ही तीन व्यक्तियों - रामगोपाल धाकड़, हंसराज चंद्रवंशी और मनोहरलाल धाकड़ ने मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा और उनकी लाखों की कृषि भूमि हड़प ली। पीड़ित ने बताया कि उनके नाम सर्वे नंबर 294, कुल रकबा 0.37 हेक्टेयर की भूमि वर्ष 2011 से उनके कब्जे में थी। 18 नवंबर 2024 को आरोपियों ने ऑनलाइन केवाईसी और भू-अधिकार पुस्तिका बनवाने के बहाने आधार कार्ड और जमीन के दस्तावेज ले लिए। अगले दिन उन्हें कलेक्टर कार्यालय बुलाकर कथित तौर पर धोखे में रखकर कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठा निशान करवा लिए।

कुछ समय बाद मोहनलाल को जानकारी मिली कि उनकी 0.12 हेक्टेयर भूमि, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 70-80 लाख रुपये बताई जा रही है, आरोपियों के नाम दर्ज कर दी गई है। पीड़ित का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें कोई प्रतिफल नहीं दिया गया और विरोध करने पर कथित रूप से कहा गया कि “जो करना है कर लो।”

मोहनलाल ने बताया कि उन्होंने कई बार स्थानीय अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार अनदेखी और लंबित शिकायतों के कारण वह मानसिक रूप से टूट चुके हैं। इस तनावपूर्ण स्थिति में उन्होंने प्रशासन के समक्ष यह कठोर कदम उठाया।

जनसुनवाई के दौरान मोहनलाल का यह अनोखा और गंभीर प्रदर्शन प्रशासनिक तंत्र के लिए चेतावनी स्वरूप साबित हुआ। उनके इस कदम ने उपस्थित अधिकारियों को असहज कर दिया और कार्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। मौके पर उपस्थित अधिकारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से किसान को समझाने का प्रयास किया और उनकी शिकायतों को रिकॉर्ड कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

जिला प्रशासन ने तुरंत इस मामले पर ध्यान देते हुए मोहनलाल की शिकायतों का संपूर्ण दस्तावेजीकरण किया। कलेक्टर कार्यालय ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए और स्थानीय तहसीलदार व संबंधित अधिकारियों को पीड़ित के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ आरोपियों के खिलाफ विधिक प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रहने को कहा।

किसान मोहनलाल की स्थिति यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि हक और अधिकारों के विवाद अभी भी गंभीर रूप में बने हुए हैं। अधिकारियों और प्रशासनिक तंत्र के सामने यह चुनौती है कि ऐसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता का विश्वास प्रणाली पर बना रहे।

इस घटना ने जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और न्यायिक तंत्र के प्रति लोगों की जागरूकता और चिंता को भी उजागर किया है। अब नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह मोहनलाल बागरी की शिकायतों का त्वरित और न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करे, ताकि किसी और व्यक्ति को इस तरह की मानसिक पीड़ा का सामना न करना पड़े।
