नीमच। कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब हनुमान नगर निवासी विष्णु शर्मा हाथ में आवेदन और दस्तावेज लेकर अधिकारियों के समक्ष पहुंचे। पीड़ा भरे शब्दों में उन्होंने सवाल उठाया- “न्याय नहीं तो यह जनसुनवाई कैसी? मैं पीड़ित हूं या अपराधी?”

विष्णु शर्मा ने आरोप लगाया कि उनके साथ 5 लाख 64 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई है। उन्होंने बताया कि अमृतलाल खारोल और उसके पिता ने शासकीय भूमि को निजी बताकर सौदा किया और उनसे पूरी राशि वसूल ली। बाद में जानकारी मिली कि जिस भूमि का विक्रय पत्र कराया गया, वह सरकारी भूमि है।

पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस से की, तो आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हीं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई, जिससे वे मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।आवेदन में उल्लेख किया गया है कि हीराबाई खारोल एवं रेखाबाई पाटीदार के नाम दर्ज निजी भूमि की आड़ लेकर उससे सटी कीमती शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किया गया। विष्णु शर्मा ने दावा किया कि यह पूरा मामला संगठित षड्यंत्र का परिणाम है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य सूत्रधार अमृतलाल खारोल और मुकेश पाटीदार हैं, जो अपनी पत्नियों के नाम को “कानूनी ढाल” बनाकर कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहे हैं। पीड़ित ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से संयुक्त एफआईआर दर्ज कराने, सीमांकन कर शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराने तथा धोखाधड़ी की राशि आरोपियों से वसूलने की मांग की है। जनसुनवाई में उठे इस प्रकरण ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
