BREAKING NEWS
NEWS : धनगर पूर्बिया समाज की महापंचायत में.. <<     NEWS : अगस्त में जिला कलक्टर डॉ. मंजू करेंगी चार.. <<     GOLD & SILVER RATE : यहां क्लिक करेंगे तो जानेंगे प्रदेश.. <<     HOROSCOPE TODAY : इन 3 राशि वालों के लिए नई उम्मीदों से.. <<     NEWS : फ्लैगशिप योजनाओं, बजट घोषणाओं और संपर्क.. <<     KHABAR : श्रावण के पहले सोमवार पर कमलासन पर विराजे.. <<     NEWS : भदेसर में भाजपा का चुनावी शंखनाद,.. <<     NEWS : अफीम किसानों को राहत दिलाने सांसद सीपी.. <<     NEWS : इतिहास के पन्ने अनमोल हैं, महापुरुष अनंत.. <<     KHABAR : समाज के दबे-कुचले वर्ग को साहित्य का नायक.. <<     KHABAR : CBSE अंडर-19 बास्केटबॉल में ज्ञानोदय.. <<     KHABAR : उल्लास कार्यक्रम के तहत मनासा तहसील.. <<     BIG NEWS : मध्यप्रदेश पुलिस की वाहन चोर गिरोहों पर.. <<     BIG NEWS : दतिया फतह के बाद नीमच में कांग्रेस का.. <<     MANDI BHAV : एक क्लिक में पढ़े कृषि उपज मंडी मनासा के.. <<     KHABAR : श्रावण में स्वच्छता का संकल्प, पशुपतिनाथ.. <<     KHABAR : मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान, अगस्त में.. <<    
वॉइस ऑफ़ एमपी न्यूज़ चैनल में विज्ञापन के लिए..
March 3, 2026, 4:19 pm
KHABAR : 78 सालों से स्वाद का खजाना घीयर मिठाई, पाकिस्तान से आए सिंधी समाज के लोग परंपरा को रखे है जिंदा, होली के दौरान बनाई और खाई जाती, पढे़ खबर 

Share On:-

खंडवा। सिंध नदी पार से आई सिंधी घीयर मिठाई भारत में रिश्तों में मिठास घोल रही है। मध्यप्रदेश के खंडवा सिंधी कॉलोनी में होली के सप्ताह भर पहले से दुकानों पर लोगों की भीड़ मिठाई खरीददारी के लिए उमड़ रही है। सिंधी समाज के बीच कई दशकों से इस मिठाई का स्वाद लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। सिंधी समाज के अलावा अन्य समाज के लोग भी अब इस मिठाई की खुशबू और इसके स्वाद को भी जानने लगे हैं।


पाकिस्तान से भारत आया परिवार कर रहा निर्वहन
खंडवा सिंधी बाजार में इस खास घीयर मिठाई को क्विंटल में खरीदने वाले व्यापारी अनिल आरतानी ने बताया की देश विभाजन के समय सिंधी समाज के लोग जब पाकिस्तान से भारत आए थे। तब मिठाई की परंपरा सिंधी घीयर भी उनके साथ भारत आई। परंपराएं, मान्यताएं हर पीढ़ियों में बदलती चली गई, टूटती गई लेकिन होली के त्योहार पर इस मिठाई का विशेष महत्व है, वह कई दशकों बाद भी आज विद्यमान है। पाकिस्तान से भारत आए सिंधी परिवार ने इसका निर्वहन बखूबी किया। तभी यह कई पीढियां में रचा और बसा हुआ है।


आखिर यह पकवान बनता कैसे
इस घीयर की इतनी डिमांड है कि रोज 15 क्विंटल घियर की खपत इन दिनों हो रही है। जिसे बनाने के लिए अलग-अलग कारीगर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। खंडवा के हीरा स्वीट्स पर पिछले 46 वर्षों से ये मिठाई खरीदने दूर दूर से लोग आते है। आखिरकार यह पकवान कैसे बनता है यह सवाल सबकी जुबान पर है। कारीगरों ने बताया की जलेबी की तरह दिखने वाली इस मिठाई को तैयार करने के लिए मैदा, दूध और केसर का घोल बनाकर दो दिनों तक खटास आने तक रख दी जाती है। दो दिनों बाद शुद्ध घी में इसे छाना जाता है। हर दुकानदार द्वारा बनाने के तरीके अलग-अलग है लेकिन स्वाद सब में एक ही है।


सभी मिठाइयों की मिठास एक जैसी
इस मिठाई की खासियत यह है कि यह एक बार तैयार हो जाने के बाद 15 दिनों से ज्यादा समय तक खराब नहीं होती। शुद्ध घी से बनने के कारण इसे लोग अपने रिश्तेदारों को गिफ्ट के तौर पर देने के लिए लंबे समय तक बचा के रखते हैं ताकि रिश्तों की मर्यादा भी बनी रहे। शुद्ध घी से बनने वाली इस मिठाई के लिए लोगों को जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ती है। तेल या डालडा में बनी मिठाई के लिए कम मूल्य चुकाना पड़ता है। लेकिन सभी मिठाइयों की मिठास एक जैसी होती है।

VOICE OF MP
एडिटर की चुनी हुई ख़बरें आपके लिए
SUBSCRIBE