सोनकच्छ। ग्राम घट्टियाभाना और चौबारा जागीर में धुलेंडी के अवसर पर आयोजित पारंपरिक मेघनाथ मेला श्रद्धा, आस्था और रोमांच का अद्भुत संगम बनकर सामने आया। वर्षों पुरानी इस अनोखी परंपरा को आज भी ग्रामवासी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ जीवित रखे हुए हैं।
मेले के दौरान शाम को गल घुमाने वाले पड़ियार का गांव में ढोल-ढमाकों के साथ जुलूस निकाला गया। ग्रामवासियों ने पड़ियार को तिलक लगाकर अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य अनुसार भेंट-पूजा अर्पित की। इसके बाद वह क्षण आया, जिसका इंतजार दूर-दूर से आए हजारों लोग करते हैं।
ग्राम घट्टियाभाना और चौबारा जागीर में करीब 42 फीट ऊंचे खंभे (लाट) पर नाल समाज के पड़ियार को चढ़ाया गया। ऊंचाई पर पहुंचने के बाद पड़ियार को चारपाई पर लिटाकर उनकी पीठ पर रीढ़ की हड्डी के ऊपर लोहे के दो हुक चमड़ी में छेद कर लगाए गए। इन हुकों में रस्सी बांधकर खंभे के शीर्ष पर लगी लकड़ी से जोड़ दिया गया और फिर उसी के सहारे गोल घुमाया गया। इस दौरान उपस्थित हजारों श्रद्धालु “मेघनाथ महाराज की जय” के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान करते रहे।
हैरतअंगेज और रोमांच से भर देने वाले इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। परंपरा के पूर्ण होने के बाद नाल समाज के पड़ियार और उनके साथियों का ग्रामवासियों व मेला समिति द्वारा साफा पहनाकर और भेंट-पूजा देकर सम्मान किया गया।
सदियों से चली आ रही यह अनूठी परंपरा आज भी क्षेत्र की आस्था, साहस और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए है, जिसे देखने हर वर्ष हजारों लोग यहां पहुंचते हैं।