शाजापुर। जिले के खेतों में गाजर की फसल किसानों की तकदीर बदल रही है. जहां पारंपरिक खेती में आवारा जानवरों और रोगों का डर बना रहता है, वहीं गाजर की फसल किसानों के लिए एक सुरक्षित निवेश बनकर उभरी है. किसान चेतन ठाकुर ने बताया की बिना किसी खास देखरेख और कम पानी में तैयार होने वाली यह फसल न केवल जानवरों से सुरक्षित है, बल्कि बाजार में इसकी हमेशा मांग किसानों को मालामाल कर रही है शाजापुर के चौंकी हिदायतपुर गाँव के लगभग किसानो की खेती तेजी से बदल रही है. यहां के किसान अब अनाज वाली फसलों के बजाय नकदी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. गाजर इस समय जिले के किसानों की पहली पसंद बनी हुई है क्योंकि इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है. कम मेहनत और कम खर्च में तैयार होने वाली यह फसल किसानों को लागत की तुलना में कई गुना बेहतर रिटर्न दे रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आया है।
गांव के रहने वाले किसान चेतन ठाकुर गाजर की खेती के बढ़ते मुनाफे की एक जीती-जागती मिसाल हैं। चेतन पिछले 3 सालों चकुंदर के साथ साथ गाजर की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अन्य फसलों के मुकाबले गाजर में जोखिम कम और कमाई सुनिश्चित है, यही वजह है कि वे अब इसे अपनी मुख्य फसल के रूप में देख रहे हैं।
गाजर की खेती से कम लागत में ज्यादा मुनाफा
गाजर की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें देखरेख की जरूरत बहुत कम होती है. एक बीघे में इसकी लागत करीब 8 से 10 हजार रुपये आती है। चेतन बताते हैं कि इस फसल को प्राकृतिक आपदा व जनवर नुकसान नहीं पहुंचाते और इसमें बीमारियां लगने का खतरा भी कम रहता है। एक बार फसल तैयार हो जाने के बाद, इसकी खुदाई दो से 3 महीने तक धीरे-धीरे की जा सकती है।