शाजापुर। जिले कि नेवज नदी के तट पर बसे अवंतिपुर बड़ोदिया में स्थित बाबा गरीबनाथ धाम समाधी स्थल पर रंगपंचमी के अवसर पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जहा 7 मार्च को पूरे प्रदेश मे रंगपंचमी पर रंग गुलाल की बौछारें उड़ी वही दूसरी ओर बाबा की नगरी में हजारों भक्तगण श्रद्धा, आस्था भक्ति के सागर में गोते लगाते हुए दिखाई दिए सन्त की समाधि स्थल पर सागौन की लकड़ी से बने 85 फुट ऊंचे स्मृति ध्वज को चढ़ाने की.मान्यता है समाधि स्थल के गड्ढे में पिछले वर्ष हजारो की संख्या में डालें गए नारियल, पान नमक आदि इस वर्ष खुदाई के पश्चात यथावत निकले जो आज के इस वैज्ञानिक युग में किसी चमत्कार से कम नहीं है..725 वर्षों से चले आ रहे हैं। इस भव्य आयोजन मे भक्तो के द्वारा बाबा के दरबार में शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। शानिवार सुबह से ही ग्रामीणों के द्वारा समाधि स्थल पर ध्वज को उतारकर आकर्षक साज-सज्जा रंगाई पुताई का कार्य करके पूजन अर्चन करके ध्वज को चढ़ाया गया श्रद्धालुओं का मानना है कि जब ध्वज चढ़ाया जाता है तब साक्षात भक्तों को दर्शन देने के लिए बाबा भंवरे के रूप में ध्वज के ऊपर मंडराते हुए दर्शन देते हैं। श्रद्धालु भी बाबा की एक झलक पाने के लिए ध्वज के ऊपर ही निगाहें जमाये रखते हैं ताकि बाबा के दर्शन करके भक्तों के द्वारा जो मन्नतें मांगते हैं वहा मनोकामना को पूरा हो जाए हैं बाबा के दर्शन पाने के लिएं आसपास के क्षेत्र सहित 50, हजार भक्तों ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। क्षेत्रीय विधायक घनश्याम चंद्रवंशी के साथ-साथ कई जन प्रतिनिधियों ने दरबार में पहुंचकर आर्शीवाद लिया।
कौन थे बाबा गरीबनाथ
बाबा गरीबनाथ जी का जन्म कब और कहाँ हुआ यह तो अज्ञात है किंतु बताया जाता है कि प्राचीन दुर्लभ लेखों के अनुसार बाबा गरीबनाथ संवत 1248 में झाँसी के जूना मठ से तीर्थ यात्रा को निकले और अवंतीपुर बड़ोदिया में नेवज नदी किनारे सुरम्य स्थान देख कुटिया बनाकर माँ लालबाई फूलबाईष् की सेवा करते हुए यही रहने लगे और उन्होंने अपने आश्रम में स्वयं माँ अन्नपूर्णा, गणेश एवं शिवलिंग की स्थापना कर अपने तप एवं दैविक शक्तियों से अनेक चमत्कार करके यही रम गए। एक दिन बाबा ने सभी ग्रामवासियों को बुलाकर अकस्मात जीवित समाधि लेने की इच्छा प्रकट की और संवत 1344 में चौत्र बिदी पंचमी को एक उत्सव के रूप में समाधि कार्यक्रम सम्पन्न हुआ कुछ माह पश्चात सावन मास संवत 1345 में गाँव के बुर्जग लोग जब तीर्थ यात्रा के लिए उत्तर प्रदेश के सोरम जी मे गंगा स्नान कर रहे थे तब एकाएक बाबा ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए जब बाबा को ग्रामीणों ने देखा तो बाबा गरीबनाथ से पुनः अवंतिपुर बड़ोदिया चलने को कहा गया तो उन्होंने मना किया तब तीर्थयात्रियों ने उन्हें हठपूर्वक डोली में बैठा दिया किंतु लश्कर के आसपास अन्तर्ध्यान हो गए और एक पत्र छोड़ गये जिसमें समाधि उत्सव का सम्पूर्ण विधान लिखा था। तभी से प्रतिवर्ष रंगपंचमी के अवसर पर ध्वज चढ़ने के साथ भव्य मेले का आयोजन यहां होता है।