जीरन। कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ. दीपा कुमावत को उच्च न्यायालय से कानूनी राहत मिली है। अदालत ने शासन द्वारा जारी उनके रामपुरा कॉलेज तबादला आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस आदेश के बाद डॉ. कुमावत फिलहाल जीरन कॉलेज में ही पदस्थ रहेंगी। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
विवाद जांच टीम के सामने हुआ-
यह विवाद तब उभरा जब कॉलेज में छात्रों की शिकायतों और प्रदर्शन के बाद उज्जैन से एक जांच टीम पहुंची थी। जांच के दौरान प्रभारी प्राचार्य डॉ. कुमावत और अतिथि विद्वान डॉ. शिखा सोनी के बीच तीखी बहस हुई, जो हाथापाई तक पहुँच गई। इस घटनाक्रम की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी गई थी, जिसके आधार पर विभाग ने प्रशासनिक आदेश के तहत डॉ. कुमावत का तबादला रामपुरा कॉलेज कर दिया था।
विद्यार्थी परिषद ने किया विरोध-
घटना के बाद जीरन पुलिस ने डॉ. शिखा सोनी की शिकायत पर डॉ. कुमावत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 1860 की विभिन्न धाराओं (296, 115(2) और 351(3)) के तहत मामला दर्ज किया। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी कॉलेज परिसर में प्रदर्शन कर प्राचार्य के पद से हटाए जाने की मांग की थी।
हाईकोर्ट आदेश के बाद की स्थिति-
डॉ. कुमावत ने अपने तबादले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया, जहां से उन्हें फिलहाल राहत मिल गई है। हालांकि, कोर्ट के आदेश के बाद कॉलेज परिसर में प्रबंधन और विरोध कर रहे छात्रों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। मामले का अंतिम निर्णय हाईकोर्ट की अगली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।