नीमच। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जहां देशभर में महिला सशक्तिकरण और सम्मान की बातें हो रही हैं, वहीं नीमच में महिलाओं की एक सहकारी समिति की उपेक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राजराजेश्वरी महिला गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित, नीमच की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं—रोटी, कपड़ा और मकान—में से मकान के सपने को पूरा करने के लिए नीमच की महिलाओं ने सहकारिता की भावना से संगठित होकर सहकारिता विभाग के माध्यम से भूखंड प्राप्त करने का प्रयास किया।
समिति का आरोप है कि नगर पालिका में अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी और उपाध्यक्ष तीनों पदों पर महिलाएं होने के बावजूद महिलाओं की इस वैधानिक मांग को अनदेखा किया जा रहा है। नगर पालिका परिषद के पार्षदों द्वारा तीन बार लिखित रूप से विशेष सम्मेलन बुलाने की मांग की गई, जो मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 43 के अंतर्गत उनका अधिकार है, लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा इस मांग को निरस्त कर दिया गया।
समिति के अनुसार नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग, भोपाल द्वारा भी सम्मेलन आयोजित करने के संबंध में पत्र जारी किया गया था, लेकिन लगभग डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वक्तव्य में कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 प्रत्येक नागरिक को समानता और गरिमामय जीवन का अधिकार देते हैं। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के Comptroller and Auditor General of India v. K.S. Jagannathan तथा Maneka Gandhi v. Union of India जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि शासन की प्रत्येक कार्यवाही न्यायसंगत, पारदर्शी और मनमानी से मुक्त होनी चाहिए।
समिति ने क्षेत्र के सांसद और विधायक से भी सवाल उठाया है कि क्या उन्होंने महिलाओं के इस वैधानिक अधिकार के समर्थन में कोई पहल की है या इस विषय में नगर पालिका स्तर पर समाधान निकालने का प्रयास किया है।
समिति का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि भी इस विषय पर मौन रहेंगे, तो यह स्थिति “अंधेर नगरी चौपट राजा” और “ढाक के तीन पात” जैसी प्रतीत होगी।
समिति ने मांग की है कि—
नगर पालिका परिषद का विशेष सम्मेलन तत्काल बुलाया जाए।
महिला सहकारी समिति के प्रस्ताव पर नियमानुसार निर्णय लिया जाए।
महिलाओं के सम्मान और सहकारिता की भावना की रक्षा के लिए शासन तत्काल हस्तक्षेप करे।
समिति ने कहा कि महिला दिवस तभी सार्थक होगा जब महिलाओं के अधिकारों और उनके घर के सपनों को वास्तविक न्याय मिलेगा।